हिसार-चंडीगढ़ हाईवे को फोरलेन बनाने का काम फिर अटक सकता है। इस निर्माण के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा मांगे गए आवेदन में केवल एक कंपनी ने रुचि दिखाई है।
इससे पहले भी केवल एक ही कंपनी ने इस काम के लिए हाथ आगे बढ़ाए थे, लेकिन विभाग ने दोबारा टेंडर करवाए। अब यह देखना है कि एनएचएआई दोबारा टेंडर करवाता है या फिर इसी कंपनी को निर्माण का जिम्मा सौंपा जाता है। यदि कमेटी इस कंपनी को टेंडर अलॉट नहीं करती है तो उस स्थिति में फिर से टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे, जिसमें एक से डेढ़ महीने का समय लग जाएगा।
इससे पहले भी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने फोरलेन के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। उस समय भी एक ही कंपनी ने आवेदन किया था। इस वजह से अथॉरिटी ने इसके लिए दोबारा आवेदन मंगवाए।
कमेटी करेगी फैसला
अब इस कंपनी को टेंडर देने और न देने का फैसला एंपावरमेंट कमेटी करेगी। यदि कमेटी इस कंपनी को टेेंडर अलॉट कर देती है तो हाईवे को फोरलेन बनाने काम जल्द ही शुरू हो जाएगा। यदि कमेटी इस कंपनी को टेंडर अलॉट नहीं करती है तो फिर से टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे और इस काम में फिर से काफी समय बर्बाद होगा।
एनएचएआई के मुताबिक कंपनियां इस प्रोजेक्ट में रुचि नहीं दिखा रही हैं। एक तो यह प्रोजेक्ट काफी बड़ा है और दूसरा बीओटी के तहत होने वाले इस प्रोजेक्ट में कंपनियां टोल विवाद की वजह से भी कंपनियां पीछे हट रही हैं। प्रदेश में कई जगह टोल विवाद चल रहा है।
रोहतक, रेवाड़ी, पानीपत, करनाल और गुड़गांव में टोल पर लोग विरोध जता रहे हैं। इस वजह से भी कंपनियां इस डर से भी इस प्रोजेक्ट में आवेदन नहीं कर रही।
हिसार-चंडीगढ़ हाईवे को फोरलेन बनाने का कार्य बीओटी (बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर) के तहत किया जाना है। अंबाला से कैथल तक का निर्माण कार्य कैथल जोन और कैथल से हिसार (राजस्थान बॉर्डर) तक का निर्माण कार्य हिसार जोन के अंतर्गत आता है।
कैथल के हिसार तक इसकी लंबाई 145 किलोमीटर है और इसकी टीपीसी 1173 करोड़ रुपये के लगभग है। फोरलेन के बाद हाईवे की चौड़ाई 60 मीटर हो जाएगी। बीओटी के तहत बनने वाले इस फोरलेन हाईवे पर कैथल से हिसार तक तीन टोल टैक्स बनाए जाएंगे।
दोबारा हुई टेंडर प्रक्रिया में भी सिर्फ एक ही कंपनी ने आवेदन किया है। अब एंपावरमेंट कमेटी इसका फैसला करेगी कि इस कंपनी को टेंडर अलॉट करना है या नहीं। - वीके जैन, प्रोजेक्ट निदेशक, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया