विजिलेंस की टीम ने रविवार को आजाद नगर चौकी परिसर में एएसआई जगबीर सिंह हुड्डा को 8000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। वह एक केस में हत्या प्रयास की धारा लगाने की एवज में कालवास के एक युवक से रिश्वत ले रहा था। विजिलेंस ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।
विजिलेंस के इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा, एसआई गोपाला राम, हेडकांस्टेबल जगमीत सिंह, इंद्र सिंह और गुरसेवक सिंह की टीम दोपहर को आजाद नगर चौकी से कुछ दूर खड़ी हो गई। तयशुुदा योजना के अनुसार गांव कालवास का रविंद्र चौकी परिसर में गया और उसने एएसआई जगबीर सिंह हुड्डा को चौकी से बाहर बुलाकर 8000 रुपये दे दिए।
एएसआई ने रुपये पेंट की जेब में डाल लिए। विजिलेंस की टीम इस सारे नजारे पर नजर रखे हुए थी। एएसआई जगबीर और शिकायतकर्ता रविंद्र आपस में बातचीत कर रहे थे कि विजिलेंस की टीम ने घेरकर एएसआई को पकड़ लिया। टीम ने पेंट की जेब से एक हजार के आठ नोट बरामद कर एएसआई को हिरासत में ले लिया। फिर टीम एएसआई को पकड़कर विजिलेंस थाना ले गई। विजिलेंस ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है।
यह है मामला
विजिलेंस के अनुसार कालवास के रविंद्र ने आजाद नगर चौकी में दूसरे पक्ष के खिलाफ मारपीट का केस दर्ज करा रखा है। केस में हत्या प्रयास की धारा जोड़ने की एवज में जांच अधिकारी एएसआई जगबीर सिंह उससे 10 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था। रविंद्र ने इसकी शिकायत विजिलेंस ऑफिस में दी।
इस पर इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा ने प्रशासन से रेड की अनुमति मांगी। प्रशासन ने पंचायती राज के एक्सईएन आरके सहरावत को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर रेड करने भेज दिया। टीम ने रेड कर एएसआई को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया।
मेरा नाम भी छपवा दें
विजिलेंस ने जिस एएसआई जगबीर सिंह को रिश्वत लेते हुए पकड़ा है, उसने एक जून को सीआईए में पुलिस पीआरओ चंद्रभान से कहा था कि मेरा नाम भी अखबारों में छपवा दें। उस दिन जगबीर का नाम मीडिया में नहीं छपा। हां अखबारों में दो अपराधियों के साथ पुलिस कर्मचारियों की सामूहिक फोटो छपी थी। उनमें वह भी था।
प्रवक्ता ने एएसआई को बताया था कि लूट की योजना बनाने के मामले का जांच अधिकारी कोई और है, इसलिए तुम्हारा नाम मीडिया में नहीं दिया जा सकता। अब एएसआई के कारनामे के बाद उसकी यह इच्छा पूरी हो गई, मगर दूसरे तरीके से।