भगाणा गांव के पीड़ित तीसरे दिन यानी 72 घंटे बाद भी लघु सचिवालय के सामने
28 वर्षीय मृतक मनोज का शव रखकर धरने पर बैठे रहे।
तीसरे दिन प्रशासन ने
शव के अंतिम संस्कार करने को लेकर व उन्हें धरने से उठाने के मामले पर कोई
बातचीत नहीं की। हालांकि धरना स्थल पर निगरानी के लिए सिटी डीएसपी जयपाल की
ड्यूटी लगाई गई थी। मौके पर पुलिस फोर्स भी तैनात की गई है। मृतक के पिता
ने कहा है कि वे बेटे का तब तक किसी हालात में शव नहीं उठाएंगे जब तक उनके
पुनर्वास की व्यवस्था और आर्थिक मदद नहीं मिलती।
जनसंगठनों से किया जा रहा है संपर्क
मृतक
मनोज के पिता बलराज ने कहा है कि सरकार उनकी मांगें मानने को अभी तक तैयार
नहीं। वे आंदोलन को और तेज करेंगे। भागाणा संघर्ष समिति के सदस्य दलित
जनसंगठनों से बातचीत कर रहे हैं। कुछ संगठन सदस्य शनिवार को भी धरना स्थल
पर पहुंचे हैं।
160 से ज्यादा परिवारों के पुनर्वास की मांग
धरना
स्थल पर बैठे लोगों ने कहा है कि उनकी मांग 160 से अधिक परिवारों के
पुनर्वास की है। ये वो परिवार हैं जो भगाणा गांव से वर्ष 2012 में पलायन कर
धरने पर बैठे थे। मृतक के पिता बलराज ने कहा कि शुरू में 200 से ज्यादा
परिवार थे मगर बीच में 50 परिवार वापस गांव लौट गए थे।
यह है मामला
बता
दें कि बुधवार को दिल्ली में भगाणा निवासी मनोज की दिल्ली में बीमारी के
कारण मौत हो गई थी। भगाणा के धरनारत लोगों ने दावा किया है कि वह पिछले चार
साल से धरने पर बैठा है। उन्होंने उसका शव हिसार लाकर लघु सचिवालय के
सामने रख दिया। प्रशासन के समक्ष उन्होंने मांग रखी है कि वे तब तक शव नहीं
उठाएंगे जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई
नहीं की जाती।