लुवास के बहु अकबरपुर स्थित इंटरनेशनल वेटरनिरी कॉलेज द्वारा कथित मनमानी कर बढ़ाई गई फीस संबंधी समस्या का समाधान जल्द ही हो सकता है। फीस को लेकर बनाई गई कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को जमा करवा दी है। अगले हफ्ते इस बात का खुलासा हो सकता है कॉलेज अधिकतम कितनी फीस ले सकता है।
लाला लाजपतराय पशु विज्ञान विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त बहु अकबरपुर के वेटरनिरी कॉलेज में कॉलेज प्रशासन द्वारा कथित रूप से विद्यार्थियों से मनमानी फीस वसूली जा रही थी। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया था कि कॉलेज प्रशासन ने कक्षा से अनुपस्थित रहने पर भी मनमाने ढंग से एक हजार रुपये प्रति कक्षा फाइन लेना शुरू कर दिया था। इसके बाद विद्यार्थियों ने सीएम से मिलकर न्याय की गुहार लगाई थी।
जांच में यूं बच निकलता था कॉलेज
विवि ने विद्यार्थियों से वसूले जा रहे दोगुने फंड को लेकर जांच की थी। लेकिन कॉलेज ने कागजात दिखाते हुए कहा था कि कॉलेज को एनओसी हरियाणा सरकार से मिली हुई है, जिसमें उसकी फीस निर्धारित की गई है। इसमें अतिरिक्त फंड लेने या नहीं लेने का कोई जिक्र नहीं है। विवि का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने सरकार को मामले से अवगत करवाया था।
कमेटी ने जांच कर बनाई रिपोर्ट
सरकार ने मामले को लेकर एक जांच कमेटी बनाई थी, जिसमें लुवास के रजिस्ट्रार, वेटरनिरी साइंस कॉलेज के डीन व पशुपालन विभाग के सरकारी अधिकारी शामिल थे। कमेटी ने विद्यार्थियों की सभी समस्याओं को सुना था और रिपोर्ट बनाकर सरकार को भेज दी थी।
इसके बाद कॉलेज की फीस निर्धारण को लेकर हाल ही में 15 दिसंबर को फिर एक बैठक हुई, जिसमें कमेटी ने कई वेटरनिरी व मेडिकल कॉलेजों के फीस स्ट्रक्चर का अध्ययन कर एक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। इस रिपोर्ट के अनुसार यह तय होगा कि कॉलेज कितनी फीस ले सकता है। अगले हफ्ते यह रिपोर्ट डिस्क्लोज हो सकती है।
विद्यार्थी कई बार कर चुके थे शिकायत
मामले को लेकर विद्यार्थी कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन व सरकार को शिकायत कर चुके थे। पिछले महीने विवि आए विद्यार्थियों ने बताया था कि वे कई जगहों पर शिकायत देने के साथ ही दो बार सीएम से भी मिल चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय में एक लाख फीस की जगह 2 लाख रुपये तक लिए जा रहे हैं।
मामले की जांच कर रिपोर्ट पशुपालन सचिव को भेज दी है। इसके बारे में कुछ भी डिस्क्लोज नहीं किया जा सकता। अब सरकार को ही इस बारे में निर्णय लेना है।
- डॉ. प्रदीप सिंह, रजिस्ट्रार लुवास एवं जांच कमेटी अध्यक्ष