हिसार। पहले से ही विवादों में चल रहे जिला नागरिक अस्पताल में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। अस्पताल में कार्यरत एक क्लर्क ने चार हजार रुपये लेकर बिजली निगम में चयनित लाइनमैन के मेडिकल सर्टिफिकेट पर खुद ही फिजिशियन के हस्ताक्षर कर दिए। मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद कमेटी की ओर से जांच शुरू भी कर दी गई है। सूत्रों की मानें तो अस्पताल प्रशासन इस मामले में विभागीय जांच कर क्लर्क को दोषी भी मान चुका है। मगर कोई भी स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी इस मामले पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। पीएमओ जहां मामले से अनभिज्ञता जता रहे हैं तो सीएमओ भी चुप्पी साधे हुए हैं।
डिप्टी सीएमओ को फिजिशियन के हस्ताक्षर पर हुआ शक तो सामने आया फर्जीवाड़ा
गुप्त सूत्रों के अनुसार आदमपुर निवासी एक व्यक्ति का बिजली निगम में लाइनमैन के पद पर चयन हुआ है। वह अपना मेडिकल बनवाने के लिए जिला नागरिक अस्पताल आया था। जब वह अस्पताल मेें पहुंचा तो देखा कि मेडिकल बनवाने का समय पूरा हो चुका था। इसके बाद उसकी मुलाकात अस्पताल में ही कार्यरत क्लर्क से हुई। आरोप है कि क्लर्क ने मौके का फायदा उठाते हुए उससे मेडिकल बनाने के नाम पर कागजात और 4 हजार रुपये ले लिए। इसके कुछ समय बाद ही क्लर्क ने कागजात फिजिशियन के हस्ताक्षर व स्टांप लगाकर वापस दे दिए। जब शिकायतकर्ता उन कागजात को फाइनल करवाने के लिए डिप्टी सीएमओ डॉ. जया गोयल के पास लेकर गया तो उनको फिजिशियन के हस्ताक्षर पर शक हो गया। इसके बाद डिप्टी सीएमओ ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीएमओ के पास भेज दिया।
कमेटी की जांच के बाद पाया गया क्लर्क को दोषी
मामला सामने आने के बाद इस मामले में सीएमओ डॉ. दयानंद द्वारा जांच कमेटी का गठन किया गया। कमेटी में डॉ. जया गोयल, डॉ. टीपी शर्मा व डॉ. रत्ना भारती को शामिल किया गया। कमेटी ने इस मामले में जुड़े लोगों व अस्पताल स्टाफ से पूछताछ और सीसीटीवी रिकार्डिंग देखने के बाद जांच पूरी की। कमेटी की पूछताछ में मेडिकल बनवाने वाले ने आरोपी क्लर्क के साथ चार हजार रुपये लेनदेन करने का आरोप लगा दिया। दो दिन तक चली जांच के बाद कमेटी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी क्लर्क इस मामले में दोषी है और उसने अपने पद का दुरुपयोग किया है। कमेटी ने आरोपी क्लर्क को दोषी मानते हुए कार्रवाई के लिए इसकी रिपोर्ट तैयार कर दी है।
कैसे किया फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि आरोपी क्लर्क को अस्पताल में एक विभाग का डीलिंग हैंड बनाया हुआ है। अस्पताल में उस विभाग से संबंधित जो भी फाइल आती है, उनका जवाब आरोपी क्लर्क की तरफ से ही बनाकर भेजा जाता है। इसी वजह से ज्यादातर विभागों व डाक्टरों के नाम की स्टांप क्लर्क के पास थी। इसी बात का फायदा उठाते हुए उसने मेडिकल पर उक्त फिजिशियन के नाम की स्टांप लगाकर उस पर डॉक्टर के नाम से हस्ताक्षर कर दिए।
जांच अधिकारी बच रहे जवाब देने से
इस मामले को लेकर जांच कमेटी के सदस्यों से जब बात करनी चाही तो वे सभी ही इस मामले में कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। डॉ. जया गोयल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं फिलहाल छुट्टी पर हूं तथा ऑफिस के किसी भी मामले को लेकर मैं बात नहीं कर सकती हूं। दूसरी ओर डॉ. टीपी शर्मा ने कहा कि मैं इस बारे में ऑफिसियल कुछ भी नहीं कहना चाहता। इस बारे में आप पीएमओ से ही बात करें। वहीं डॉ. रत्ना भारती ने कहा कि इस बारे में बात करने के लिए सोमवार को कार्यालय में पहुंच कर जानकारी लें। फोन पर कोई जानकारी नहीं दी जा सकती।
सीएमओ की तरफ से एक मामला भेजा गया था। इसमें एक मेडिकल प्रमाण पत्र पर अस्पताल के कर्मचारी द्वारा फिजिशियन के फर्जी हस्ताक्षर करने की बात थी। इस मामले में तीन सीनियर डॉक्टरों की कमेटी द्वारा जांच की जा रही है।
- डॉ. रविंद्र सिंह पूनिया, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल, हिसार।