अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
करीब 25 साल से भंवरलाल ने अपने परिवार से रिश्ता तोड़ा हुआ था। इस कारण भंवरलाल और उसकी पत्नी की मौत पर भी उसके परिजन नहीं आए। भंवरलाल और संतोष का अंतिम संस्कार उसके गांव की मिठनपुरा की बजाए सुसराल कोहली गांव में किया गया।
ऐलनाबाद के मिठनपुरा वासी भंवर लाल पत्नी संतोष और गोद लिए हुए बेटा-बेटी के साथ रहता था। भंवर लाल ने अपने परिजनों से करीब 25 साल से दूरी बनाई हुई थी। अपने घर में उनका आना-जाना नहीं था। भंवरलाल की मौत के समय भी पारिवारिक सदस्य शव लेने तक नहीं आए। मृतका संतोष के परिजनों ने ही दोनों शव लिए। इसके बाद गांव खारा बरवाला में उनका अंतिम संस्कार किया। रीति रिवाज के अनुसार भंवरलाल का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव मिठनपुरा में होना चाहिए था। उसी पत्नी संतोष का अंतिम संस्कार भी मिठनपुरा में ही होना था।
बयान में विरोध
पुलिस को दिए बयान में मृतक भंवरलाल के साले गांव कोहली निवासी राजेश का कहना है कि 10-15 दिन से उसकी बहन-जीजा में अनबन चह रही थी। इसके चलते संतोष परेशान थी। अनबन के बारे में संतोष ने कुछ नहीं बताया था।
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चचेरी बहन बोली, भाई-भाभी के बीच कभी विवाद नहीं हुआ
मृतक भंवरलाल की चचेरी बहन भिवानी वासी सुनीता ने बताया कि भाई और भाभी के बीच कभी कोई विवाद नहीं हुआ। एक महीना पहले दो मिनट बातचीत हुई थी। कुछ दिन पहले भंवरलाल ने खारा बरवाला में अपना प्लॉट बेचा था।
सीढ़ी से चढ़कर लगाया फंदा
भंवरलाल ने संतोष की कुल्हाड़ी से हत्या करने के बाद दूसरे कमरे में सीढ़ी लगाई। सीढ़ी के जरिए छत में लगे लोहे के जाल में रस्सी डालकर फंदा लगा लिया। उसका एक पांव सीढ़ी पर टिका हुआ था।
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मां का खून से लथपथ शव देख रोने लगा जतिन
रात करीब तीन बजे भंवर लाल का गोद लिया 8 वर्षीय बेटा जतिन अपनी मां का शव देखकर रोते हुए बाहर निकला। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर पास में बने मंदिर का पुजारी बाहर निकला। जतिन पुजारी का हाथ पकड़कर अंदर ले गया। पुजारी ने देखा कि एक कमरे के अंदर भंवर सिंह ने फंदा लगाया हुआ है। दूसरे कमरे में उनकी पत्नी संतोष का शव लहूलुहान हालत में जमीन पर पड़ा हुआ था। पास में एक खून से सनी कुल्हाड़ी पड़ी हुई मिली।
शव लेने नहीं आए भंवरलाल के परिजन, सुुसराल में हुआ अंतिम संस्कार
ऐलनाबाद के मिठनपुरा का था भंवरलाल, करीब 25 साल से परिजनों से तोड़ा हुआ था रिश्ता