हांसी। मानसून की बेरुखी और जल निकासी की लापरवाही ने किसानों की मेहनत पर दोहरी मार की है। हांसी उपमंडल के दर्जनों गांवों में लगातार बुधवार और वीरवार को हुई बारिश से खेतों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया है। इसका सबसे बड़ा असर नरमा और धान की फसलों पर पड़ा है। किसानों ने गेहूं की कटाई के बाद मानसून से पहले नरमा की बिजाई की थी, लेकिन एक महीने पहले हुई बारिश में नरमा की फसल बर्बाद हो गई। मजबूरन किसानों ने दोबारा प्रयास करते हुए धान की रोपाई की, लेकिन इस बार फिर बारिश और जलभराव ने धान की फसल को भी चौपट कर दिया। किसानों की मांग है कि प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप करे और खेतों से जल निकासी की व्यवस्था कराए, वरना फसल के साथ-साथ अगली बिजाई की उम्मीदें भी डूब जाएंगी।
सबसे ज्यादा प्रभावित गांव
चानौत, भाटला, घिराय, जीतपुरा, भाटोल, खरकड़ा, सोरखी, गढ़ी, मोहला, बड़छप्पर, उगालन, पुट्ठी, रामपुरा और सात बास जैसे गांवों में जलभराव से हजारों एकड़ फसल खराब हो चुकी है। भाटला और चानौत जैसे गांवों में तो पिछली बारिश का पानी भी पूरी तरह नहीं निकला था, अब दो दिन हुई बारिश ने हालात और बिगाड़ दिए।
हर साल की कहानी दोहराई गई
दिल्ली रोड से सटे गांव हाईवे से नीचे होने के कारण हर साल जलभराव की चपेट में आ जाते हैं। इस बार भी वही स्थिति बनी हुई है। ड्रेनों की सफाई न होने से वे ओवरफ्लो की स्थिति में हैं और खेतों में पानी लगातार बढ़ रहा है।
गांवों के घरों में भी पानी
सिर्फ खेत ही नहीं, रिहायशी इलाके भी पानी में डूब गए हैं। सात बास क्षेत्र के रामायण और देपल गांवों में घरों तक पानी घुस गया है। दो दिनों से जल निकासी न होने के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
खेतों में नरमा व बाजरे की बिजाई की थी लेकिन बारिश से फसलें पूरी तरह खराब हो गई हैं। कई दिनों से खेतों में पानी खड़ा है। पानी की निकासी हो तो ही कोई और फसल की बिजाई कर पाएंगे।- राजकुमार जांगड़ा, भाटोल जाटान
खेतों में पहले से भरे पानी से राहत नहीं मिली थी कि अब लगातार दो दिन हुई बारिश से समस्या बढ़ गई है। खेतों में दो से तीन फीट पानी भरा है।- जयवीर, भाटोल जाटान
साढ़े चार एकड़ में धान की बिजाई एक महीना पहले की थी। बारिश के बाद फसल में पानी जरूरत से ज्यादा खड़ा हो गया है जिससे पूरी फसल बर्बाद हो गई। गांव में बाकी सभी जगह यही हाल है।- दिनेश मलिक, देपल
देपल गांव में वार्ड एक व तीन में पानी भर गया है। पानी घरों में भी पहुंच गया है। साथ ही गांव की 500 एकड़ खेतों में पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव व खेतों से पानी की निकासी की जाए।- अशोक मलिक, पूर्व सरंपच
सोरखी से पानी की निकासी के लिए दो लाइनें बिछाई हुई हैं लेकिन अभी तक मोटर चलाकर इन लाइनों के माध्यम से पानी की निकासी नहीं की गई। हालत बदतर हो गए हैं।- मनजीत, सोरखी
खेतों से पहले से भरा हुआ पानी नहीं निकला। अब बारिश से समस्या और बढ़ गई है। गांव में सबसे ज्यादा धान व नरमा की फसल की बिजाई की गई थी। लगभग सारी खराब हो गई।- दीपक, सोरखी
बारिश से पहले ड्रेनों में पानी का स्तर कम हो गया था। बारिश के बाद पानी का स्तर बढ़ गया है। पानी की निकासी के पूरे प्रबंध किए जा रहे हैं। - नवदीप सांगवान, एक्सईएन, सिंचाई विभाग