मनरेगा बचाओ अभियान के तहत लघु सचिवालय के बाहर धरना देते कांग्रेस कार्यकर्ता।
हिसार। मनरेगा बचाओ अभियान के तहत शुक्रवार को कांग्रेस की ओर से लघु सचिवालय के बाहर धरना दिया गया। ग्रामीण जिला अध्यक्ष बृजलाल बहबलपुरिया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। जिलास्तरीय इस धरने में कांग्रेस के तीनों विधायक और सांसद की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही।
धरने में मौजूद वक्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा में बदलाव कर मजदूरों से उनकी रोजी-रोटी छीनने का प्रयास कर रही है जिसे कांग्रेस किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।
बहबलपुरिया ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा है। इसे कमजोर या समाप्त करना आमजन के अधिकारों पर सीधा प्रहार है। मजदूर, किसान और गरीब वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस लगातार संघर्ष करती रहेगी और जब तक मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल नहीं किया जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम करोड़ों गरीब, मजदूर और जरूरतमंद परिवारों के लिए कानूनी अधिकार के रूप में सम्मानजनक आजीविका का साधन रहा है। इसे समाप्त कर वीबी जीराम जी अधिनियम लागू करना पूरी तरह गरीब और मजदूर विरोधी कदम है। नए कानून के माध्यम से रोजगार की गारंटी को खत्म कर इसे सरकारी नियंत्रण और विवेकाधीन व्यवस्था में बदल दिया गया है।
उन्होंने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने को देश के इतिहास और उनके आदर्शों का अपमान बताया। पहले ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर 100 दिनों के रोजगार का अधिकार था जिसे नए कानून में समाप्त कर दिया गया है। 125 दिनों के रोजगार का दावा पूरी तरह भ्रामक है। पार्टी की ओर से कृषि विभाग उप निदेशक डॉ. राजबीर सिंह को ज्ञापन भी सौंपा गया।
इस अवसर एआईसीसी सदस्य राजेश संदलाना, पूर्व चेयरमैन भूपेन्द्र सिंह गंगवा, एचपीसीसी सदस्य दिलबाग ढांडा, धर्मवीर गोयत, पूर्व जाट शिक्षण संस्थान प्रधान योगेंद्र पाल बामल आदि उपस्थित रहे।