व्यापारियों ने कहा, साहब! हमें डिस्पले के लिए कम से कम तीन फुट जगह तो दे दो। इस पर कमिश्नर अशोक बंसल ने कहा कि तीन फुट जगह की बात तो दूर बरामदे में एक इंच जगह भी नहीं दूंगा। मर्जी आपकी है। अगर ये चूहे-बिल्ली वाला खेल खेलना चाहते हो तो हमें कोई एतराज नहीं। हम अपना काम कर रहे हैं, आपके पास भी आजादी है जो करना चाहे करो। इतना सुनते ही व्यापारियों की बोलती बंद हो गई। व्यापारियों ने कहा कि निगम के कर्मचारी बदतमीजी करते हैं। कमिश्नर ने साफ कहा कि क्या आप बदतमीजी नहीं करते। हम बार-बार आपको बोल रहे हैं कि सामान उठा लो, लेकिन आप लोग कभी मानते ही नहीं। उन्होंने इशारों ही इशारों में यहां तक कह डाला कि चाहे मेरी बदली करवा दो, मैं आज यहां हूं तो कल पता नहीं कहां चला जाऊंगा, लेकिन जब तक इस कुर्सी पर हूं, बरामदे खाली करवाकर ही दम लूंगा।
दो दौर में हुई बात
निगम कार्यालय पहुंचे व्यापारियों की दो दौर में बातचीत हुई। पहले दौर में सभी व्यापारी एक साथ कमिश्नर ऑफिस में चले गए। कमिश्नर ने भी व्यापारियों को साफ कहा कि इसमें कोई छुपाने वाली बात नहीं है। जो भी फैसला होगा, सबके सामने होना चाहिए। कमिश्नर ने सबके सामने दो टूक बोल दिया कि हम हमारा काम करेंगे और आप जो चाहे कर सकते हो। हक मांगना आपका अधिकार है। रही बरामदे की बात तो वो एक इंच भी जगह आपको नहीं मिलेगी। इस पर व्यापारियों ने कहा कि हम बात कर लेते हैं। अब हमारा प्रतिनिधिमंडल आपसे मिल लेगा। इस पर कमिश्नर ने सहमति दे दी। करीब 10 मिनट बाद छह सदस्यीय दल प्रधान अक्षय मलिक की अध्यक्षता में फिर कमिश्नर से मिला। उन्होंने कमिश्नर की बात पर भी सहमति जताई और कहा कि हम 10 दिन में पहले आपको व्यवस्था बनाकर दिखाते हैं। इसके लिए हमें केवल आपकी टीम से दो कर्मचारी चाहिए। इस पर कमिश्नर ने कहा कि हम सहमत हैं।
कल से नहीं दिखेंगी रेहड़ियां, पार्किंग वाले को भेजेंगे नोटिस
व्यापारियों ने कहा कि रेहड़ियां बाजारों में अतिक्रमण कर रही हैं। पार्किंग की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। अवैध तरीके से वसूली हो रही है। बाजार में टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है। दुकानों के पीछे पड़ी जगह में भी पार्किंग व्यवस्था करवाई जाए। इस पर कमिश्नर ने कहा कि हां जो आपकी जायज मांग है, हम मानने को तैयार है। मंगलवार से आपको शहर में रेहड़ियां नजर नहीं आएगी। दूसरे काम की भी समझो प्रोसेस शुरू हो गई। पार्किंग वाले को हम नोटिस दे देंगे।
मिलने वालों में ये रहे शामिल
रवि महता एडवोकेट, नवीन आहूजा, अजय सैनी, सुभाष मित्तल, हरबंस नागपाल, सुरेश कामरा, सुरेंद्र सोनी, संजय बजाज, अशोक कुमार, जितेंद्र वासुदेवा, बिश्नोई मंदिर मार्केट, अशोक असीजा लक्ष्मी सहित कई व्यापारी मौजूद थे।
हम 10 दिन के अंदर मार्केट में व्यवस्था बनाकर दिखाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि अगले 10 दिन तक मार्केट में टीम नहीं आएगी। केवल दो कर्मचारी वे हमें देंगे। हमारी मांग है कि हमें डिस्पले के लिए जगह चाहिए। हम खुद चाहते हैं कि अतिक्रमण हटे। जो लोग साथ नहीं गए, वे केवल एसोसिएशन के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। वे व्यापारियों के सच्चे हितैषी नहीं।
- अक्षय मलिक, प्रधान राजगुरु मार्केट वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन
जो कमिश्नर से मिलने गए, उनमें कोई व्यापारी नहीं थे। वे अधिकतर बरामदों में स्टाल लगाने वाले लोग थे। हम तो चाहते हैं कि राजगुरु मार्केट ही नहीं पूरा शहर अतिक्रमण मुक्त हो। प्रशासन व्यवहारिकता के साथ अतिक्रमण हटाए। नाजायज हम करने नहीं देंगे। छोटे दुकानदारों या स्टॉल लगाने वालों के लिए प्रशासन कोई अलग व्यवस्था करे।
- राजेश जैन, प्रधान राजगुुुरु मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन
ये है सच
- बरामदों का किराया ले रहे हैं कुछ दुकानदार
- बरामदों का लेवल ऊंचा उठाने वालों ने नीचे बेसमेंट बनाया हुआ है।
- एसोसिएशन में शामिल कई पदाधिकारियों ने भी किया हुआ है अतिक्रमण।
- रेहड़ी लगवाने के नाम पर भी लेते हैं किराया।