जाट आरक्षण आंदोलन की आग में जलते शहर में शांति होने और कर्फ्यू हटने के तीसरे दिन शुक्रवार को स्कूल और कॉलेज खुले। स्कूल खुलने से बच्चों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। वहीं शहर के सभी कॉलेजों में रौनक नजर आई।
आरक्षण पर हुए उपद्रव और शहर से कर्फ्यू हटने के बाद स्कूल-कॉलेजों में खुशी देखते ही बनी। हालांकि अधिकांश कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या लगभग आधी रही और पुलिस और आर्मी के पहरे में कॉलेज खुले। किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक कॉलेज के सामने सेना व पुलिस तैनात रही, जिन्होंने हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी।
कृषि विश्वविद्यालय के सभी गेटों पर मुस्तैद जवान समय-समय पर विवि परिसर का दौरा करते रहे। इसके अलावा कॉलेज प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद रहा। वहीं जीजेयू विवि में पहले ही 28 फरवरी तक का अवकाश घोषित किया हुआ है।
जाट कॉलेज के मुख्य गेट पर पुलिसकर्मियों का पहरा
कॉलेज के सामने जाट धर्मशाला में तैनात सेना के जवान भी कॉलेज पर नजर रखे हुए थे। वहीं कॉलेेज के प्राचार्य आईएस लाखलान अपने दफ्तर में लगी एलईडी से कॉलेज के चप्पे-चप्पे का जायजा लेते रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सब शांतिपूर्ण चल रहा है।
लेकिन कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या आधे से भी कम है। कक्षाओं में नाममात्र के विद्यार्थी नजर आ रहे हैं। सोमवार तक माहौल पूरी तरह से शांत हो जाएगा और कॉलेज में विद्यार्थी नियमित हो जाएंगे।
राजकीय महाविद्यालय में भी रही नजर
राजकीय महाविद्यालय में भी माहौल शांतिपूर्ण रहा और कक्षाएं लगीं। हालांकि इधर भी विद्यार्थियों की संख्या लगभग आधी रही। कॉलेज के बाहर सेना के एक ट्रक व जिप्सी के अलावा पुलिस भी तैनात रही। कॉलेज के प्राचार्य एमएस मांझू अपने स्टॉफ के साथ लगातार कॉलेज का दौरा करते रहे।
उन्होंने बताया कि वे सेना व पुलिस के अधिकारियों से दो बार मिल चुके हैं। और उनके साथ मिलकर कॉलेज की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए हैं।
विद्यार्थियों ने जताया संकल्प
इस दौरान दोनों कॉलेजों के विद्यार्थियों में जाट आरक्षण के दौरान हुए दंगों की पीड़ा थी। विद्यार्थियों ने कहा कि इससे गलत संदेश गया है।
प्रदेश में वर्षों से चला आ रहे भाईचारे में कुछ लोगों ने दरार डालने की कोशिश की। इस मौके पर विद्यार्थियों ने एकजुट होकर राष्ट्र के विकास के प्रति संकल्प जताया।