पाखंडी बाबा व तांत्रिक कैसे लोगों को उल्लू बनाते है। किस तरह से बंद नारियल से लाल कपड़ा, ताबीज या कोई अन्य वस्तु निकाल देते हैं। ये किस प्रकार अंगारों पर चल लेते है। इन सब बातों का रहस्य से पर्दा उठा रही है साइंस एक्सप्रेस। प्रदर्शनी के दूसरे दिन दो गुनी संख्या में विजिटर पहुंचे। कम्यूनिकेटर्स प्रशांत शर्मा, गुरमीत व नचिकेत भट्ट ने प्लेटफार्म पर डेमो दिखाकर विद्यार्थियों व अन्य विजिटर को बताया कि नारियल की तीन आंखों में से एक में आसानी से छेद हो सकता है। इसलिए तांत्रिक लोग नारियल की तीसरी आंख में छेद करते हैं तथा उसमें कोई वस्तु डालने के बाद उसे फेवीकॉल आदि से वापस चिपका देते है। उस जगह हल्दी, सिंदूर आदि से तिलक लगा देते हैं। नारियल तोड़कर वो उसमें पहले से रखी वस्तु को बाहर निकाल कर लोगों को दिखाते हैं।
इस प्रकार अंगारे पर चल पड़ते है लोग
अंगारों पर चलने के लिए व्यक्ति का शरीर ही उसकी मदद करता है। शरीर में पानी व खून की वजह से मॉइश्चर होता है, जिससे शरीर के किसी अंग को जलने में तीन सेकेंड का समय लगता है। इस बात का फायदा उठाते हुए तांत्रिक अन्य लोगों को उल्लू बनाते है। अंगारों पर चलने से पहले पैरों को पानी में भिगोकर मिट्टी चिपका लेते है, जिससे तीन सेकेंड तक तो आदमी का शरीर उसे झुलसने से बचाता है।
साइंस एक्सप्रेस पर दूसरे दिन बुधवार को 8311 विजिटर ट्रेन देखने पहुंचे। इनमें 4216 जनरल विजिटर प्रदर्शन देखने पहुंचे। वहीं 52 स्कूलों के 1837 विद्यार्थियों ने 120 टीचरों समेत ट्रेन का दौरा किया। इस दौरान जॉय ऑफ साइंस के कोच में 231 विद्यार्थी, किड्ज जोन में 340 विद्यार्थी शामिल हुए। वहीं प्लेटफार्म पर मॉडल व अन्य गतिविधियों को देखने के लिए 1559 लोग पहुंचे।
बच्चों में क्रेज
किड्ज जोन व जॉय ऑफ साइंस के कोच में जाने के लिए बच्चों में अधिक क्रेज देख गया। इन दोनों कोच में पहले दिन की बजाय अलग तरीकों से विज्ञान के बारे में बताया गया। दूसरे दिन सामान्य तरीकों से विज्ञान में गुरुत्वाकर्षण, न्यूटन के सिद्धांत आदि के बारे में बॉल, पेंसिल, रबर व अन्य चीजों से बच्चों को वैज्ञानिक तरीके से समझाया गया।
स्कूल दूर है तो कम्यूनिकेटर पहुंचेंगे आपके स्कूल
ट्रेन में किड्ज जोन व जॉय ऑफ साइंस के कम्यूनिकेटर जिले के बच्चों को उनके स्कूल में जाकर भी विज्ञान से जुड़े पहलुओं की जानकारी दे सकते हैं। अगर आपका स्कूल दूर है और आप ट्रेन का भ्रमण नहीं कर सकते तो साइंस एक्सप्रेस के कम्यूनिकेटर से संपर्क करके ट्रेन के कम्यूनिकेटर्स को आप अपने स्कूल मेें भी बुला सकते हैं।