केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान ने देश में पहले उत्पादित क्लोन से अलग तरीके से क्लोन तैयार कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
संस्थान ने एक क्लोन कटड़ा तैयार किया है, जिसका जन्म 11 दिसंबर को सामान्य प्रसव के जरिए हुआ। संस्थान ने इसका नाम सीआईआरबी गौरव रखा है।
इसका वजन 40.4 किलोग्राम है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ. इंद्रजीत सिंह ने बताया कि एक अनोखी उपलब्धि के रूप में तैयार किया गया क्लोन कटड़ा है। जो फिलहाल पूरी तरह से स्वास्थ्य है और इसकी सामान्य पशुओं की भांति गतिविधियां हैं।
दुनिया का तीसरा और देश का दूसरा संस्थान बना हिसार
इस उपलब्धि पर भैंस अनुसंधान संस्थान क्लोन भैंस उत्पादन करने वाला दुनिया का तीसरा तथा देश का दूसरा संस्थान बन गया है। यह उपलब्धि क्लोनिंग द्वारा बेहतर भैंस जर्मप्लास्म के संरक्षण एवं गुणन परियोजना के तहत हुई है।
उन्नत मुर्राह झोटे 4354 का क्लोन है हिसार बी गौरव
डॉ. प्रेमसिंह यादव के अनुुसार बेहतर नर या मादा का क्लोन तैयार करना ही इस परियोजना का उद्देश्य है। तैयार किया गया क्लोन कटड़ा भी एक उन्नत मुर्राह झोटे 4354 का क्लोन है।
53 प्रतिशत है इस झोटे के वीर्य से गर्भाधान दर
कृत्रिम गर्भाधान के लिए इस झोटे के वीर्य की काफी मांग है तथा गर्भाधान दर लगभग 53 प्रतिशत है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड ने अनुसंधान संस्थान के युवा वैज्ञानिक डॉ. नरेश सेलोकर को क्लोनिंग तकनीक को सरल एवं इसकी क्षमता बढ़ाने के लिए 25 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।