हिसार। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनियों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मृतक बीमाधारक की पॉलिसी रद्द करना अनुचित करार दिया और शिकायतकर्ता अनिल कुमार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए 10 लाख रुपये का बीमा दावा मंजूर किया।
शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने बताया कि वर्ष 2013 में उनके पिता हीरा लाल ने एचडीएफसी लाइफ से बीमा पॉलिसी ली थी। जनवरी 2019 में पिता के निधन के बाद कंपनी ने दावा मंजूर करने के बजाय मनमाने ढंग से पॉलिसी रद्द कर दी। कंपनी का तर्क था कि बीमाधारक ने कुछ जानकारी छिपाई थी, जिसे आयोग ने तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया।
आयोग ने कहा कि कंपनी पॉलिसी जारी करते समय सभी दस्तावेजों की जांच की जिम्मेदार होती है। बिना ठोस आधार के दावा अस्वीकार करना सेवा में कमी और उपभोक्ता के साथ अन्याय है। इसी के आधार पर आयोग ने कंपनी को आदेश दिया कि वह अनिल कुमार को 10 लाख रुपये का बीमा दावा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा करे। इसके अलावा मानसिक, शारीरिक और आर्थिक उत्पीड़न को देखते हुए आयोग ने कंपनी पर 55 हजार रुपये का अतिरिक्त हर्जाना भी लगाया। आयोग ने निर्देश दिया कि अगर 45 दिन के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो कंपनी को 12 प्रतिशत ब्याज देना होगा।