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Hisar News: दो से तीन हजार रुपये लेकर परिवार पहचान पत्र में कर रहे थे बदलाव, 7 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज

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उकलाना, बालसमंद। परिवार पहचान पत्र( पीपीपी) में बदलाव के कुछ बिंदुओं पर रोक के बावजूद बदलाव करने वाले कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों के एक गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। आरोपी 2 से 3 हजार रुपये लेकर आईडी में बदलाव कर देते थे। अतिरिक्त उपायुक्त नीरज कुमार ने इस मामले की आरंभिक जांच की थी। उकलाना पुलिस ने इस मामले में 7 सीएससी संचालकों के खिलाफ आईटी एक्ट सहित 10 अलग-अलग धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोपियों में 3 उकलाना, 1-1 नारनौंद व बरवाला और 2 लोग फतेहाबाद जिले के हैं।
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अतिरिक्त उपायुक्त नीरज ने पुलिस को भेजी शिकायत में बताया कि परिवार पहचान पत्र में हरियाणा सरकार ने बैंक अकाउंट अपडेशन, व्यवसाय बदलना, रिहायश बदलना, परिवार को विभाजित करना प्रतिबंधित कर रखा है। इसका निपटारा मुख्यालय द्वारा ही किया जाता है। मगर कुछ समय से कॉमन सर्विस सेंटर संचालक गांव कुंंदनपुरा से अमित कुमार, गांव प्रभुवाला से सुनील कुमार, प्रदीप श्योराण उकलाना, बरवाला से अमित, नारनौंद से सोनू, गांव समैण,(टोहाना) से जगदीश, तिब्बी (फतेहाबाद) से सुरेंद्र इन प्रतिबंधित मॉडयूल में छेड़छाड़ कर रहे थे। इन सभी आरोपियों पर केस दर्ज हुआ है।
अलग-अलग करते थे बदलाव का कार्य
अतिरिक्त उपायुक्त नीरज ने सीएससी ऑपरेटर अमित कुमार से पूछताछ की तो पता लगा कि परिवार पहचान पत्र में व्यवसाय बदलने का कार्य प्रभुवाला का कॉमन सर्विस सेंटर का संचालक सुनील कुमार, प्रदीप सहारण, अमित बरवाला और सोनू नारनौंद करते थे। अमित बरवाला से लेबर कॉपी का कार्य, सोनू नारनौंद से आईडी विभाजित का कार्य और प्रदीप श्योराण से कंस्ट्रक्शन वर्क का कार्य करवाया जाता था। फैमिली आईडी में बदलाव करने का कार्य जगदीश समैण भी करवाता था।
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ऐसे खुला मामला
कुछ फैमिली आईडी की जांच की गई। आरोपी अमित कुमार ने शूरती देवी की फैमली आईडी में व्यवसाय कंस्ट्रक्शन वर्क किया। इसी फैमिली आईडी को विभाजित किया गया। जबकि इस पर रोक है। इसी प्रकार अशोक कुमार की फैमिली आईडी में भी बदलाव किया गया। अशोक ने बताया कि अमित कुमार ने कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए तीन हजार रुपये तथा फैमिली आईडी को विभाजित करने के लिए दो हजार रुपये लिए थे।


मेंबर डिलीट करवाने के 700 रुपये लेते थे

कॉमन सर्विस सेंटर संचालक अमित स्वयं बरवाला को लेबर कॉपी अप्रूव करवाने के बदले में 1500 रुपये देता था। जबकि लोगों से फैमिली आईडी अलग करवाने के लिए 1800 रुपये लेता था। वह 1500 रुपये बदलाव करने वाले ऑपरेटर को देता था। फैमिली आईडी से मेंबर डिलीट करने के लिए 700 रुपये लेता था।


मुख्यालय की जांच में सामने आए दूसरे संचालक
चंडीगढ़ मुख्यालय के अधिकारी अरुण महिंदरू ने जांच शुरू की तो पता चला कि कुछ पीपीपी में सुरेंद्र निवासी फतेहबाद व सुनील कुमार निवासी प्रभुवाला द्वारा संशोधन किया जा रहा है। इसके बाद ही एक सेंटर के बजाय पूरे गैंग की जांच शुरू हुई।
जिस काम में हो रही थी छेड़खानी, विभाग ने पोर्टल से किए ऑप्शन गायब

बालसमंद। परिवार पहचान पत्र के जिन ऑप्शन में छेड़खानी की जा रही थी, वे ऑप्शन क्रीड विभाग ने पोर्टल से तुरंत प्रभाव से फैमिली आईडी की मुख्य साइट से ही हटा दिए हैं। जब से प्रदेशभर में परिवार पहचान पत्र का कार्य शुरू हुआ है तब से इसमें कुछ लोगो द्वारा नाजायज तरीके से कार्य कर रहे थे। विभिन्न प्रकार की छेड़खानी करवाने का सीधा सा मतलब है सरकारी योजनाओं का लाभ लेना।
जानकारी के अनुसार फैमिली आईडी अलग बनवाने के लिए पोर्टल पर ऑप्शन दिया हुआ था। उसमें बिजली बिल डालकर अलग करने के ऑप्शन था, लेकिन वह ऑप्शन कार्य नहीं कर रहा था। कुछ लोगो द्वारा पोर्टल में सेंधमारी करके परिवार पहचान पत्र में छेड़खानी की जा रही है। नाजायज तरीके से हो रहे कार्य में जन्मतिथि बदलाव, आईडी अलग बनाना, आईडी के मुखिया को बदलना सहित कुछ अन्य कार्य किये जा रहे थे। अब एडीसी की जांच के बाद परिवार पहचान पत्र के मुख्य पोर्टल से नाजायज तरीके से हो रहे कार्यों के ऑप्शन को ही हटा दिया है।
प्रोसेस से काम करवाने में लग रहा महीनाभर, सेंधमारी से 2 मिनट में
सरकार की महत्वपूर्ण योजना में सेंधमारी करके छेड़खानी का कार्य काफी दिनों से चल रहा है। इन्हीं कार्यों को करवाने के लिए पोर्टल पर आम जन के लिए ऑप्शन भी दिया है, लेकिन पोर्टल पर दिए गए ऑप्शन से कार्य करवाने में जहां महीना भर लग रहा था वही कार्य नाजायज तरीके से दो मिनट में हो रहा था।
गलती मानने पर बक्शा, घर जा लगाए स्टेटस तो दर्ज हुई एफआईआर
बुधवार को इन्हीं सातों आरोपियों को एडीसी कार्यालय में बुलाया गया था। इन लोगो द्वारा लिखित में गलती मानने और भविष्य में नाजायज कार्य नहीं करने के लिए लिखवाकर छोड़ दिया गया था। इसके बाद इन लोगो ने घर जाते ही स्टेटस लगाए तो एडीसी कार्यालय ने अगली कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करवाया।
आसानी से मॉड्यूल में सेंधमारी कर रहे कंप्यूटर के जानकार, अपात्र भी उठा रहे योजनाओं का लाभ

सरकार ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए योजनाओं में ऑनलाइन पंजीकरण शुरू कराया, लेकिन कंप्यूटर के जानकारों ने सरकार मॉड्यूल में सेंधमारी कर धोखाधड़ी का धंधा शुरू कर दिया। उकलाना में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) में प्रतिबंध के बावजूद बदलाव का खुलासा हुआ है। चर्चा है कि गोल्डन कार्ड, लेबर काॅपी समेत अन्य योजनाओं में इस तरह का खेल बड़ी आसानी से चल रहा है। अपात्र लोग दो-चार हजार रुपये खर्च कर आसानी से सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
3500 रुपये में बन रहा आयुष्मान कार्ड

सरकार की अधिकांश योजनाएं आधार कार्ड व फैमली आईडी के आधार पर दी जा रही हैं। लेबर डिपार्टमेंट की बोर्ड ऑफ कंस्ट्रक्शन स्कीम में मजदूर पंजीकरण के लिए 1500 से 2 हजार रुपये लिए जा रहे हैं। अगर किसी का आयुष्मान भारत योजना में लाभ नहीं है तो नाम शामिल करने के लिए 3500 रुपये लिए जा रहे हैं। कॉमन सर्विस सेंटर से जुड़े सूत्रों ने बताया कि परिवार पहचान पत्र में कंस्ट्रक्शन वर्कर करवाकर आमजन लेबर डिपार्टमेंट की मजदूरी कॉपी बनवाता है। पंजीकृत मजदूर एक लाख रुपये कन्यादान और 8 हजार रुपये से 51 हजार रुपये तक शिक्षा छात्रवृति हर साल मिलती है। इसके अलावा फैमिली आईडी अलग बनवाकर आय कम दर्शाकर आयुष्मान कार्ड बनवाना चाहता है। आईडी में कम आय दिखाकर राशनकार्ड का भी लाभ लिया जा रहा है।
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