फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चक्का जाम : हिसार-हांसी डिपो की 225 रोडवेज बसों के थमे पहिये

विज्ञापन
विज्ञापन
हिसार। रोडवेज कर्मचारियों ने बुधवार को चक्का जाम कर दिया। इसके कारण बस स्टैंड पर पहुंचीं सवारियां गंतव्य तक पहुंचने के लिए भटकती रहीं। रोडवेज कर्मचारियों ने अंबाला डिपो के चालक राजबीर की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हड़ताल का फैसला लिया है। अलसुबह 3.40 पर चंडीगढ़ जाने वाली पहली बस भी नहीं चली। इस दौरान कर्मचारियों ने बस स्टैंड परिसर में सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं निजी बस संचालकों ने दिनभर ग्रामीण रूटों पर कम और लंबे रूटों पर बसें चलाईं। यात्री दिनभर बसों के लिए इधर से उधर भटकते रहे। हिसार और हांसी डिपो में 225 बसे हैं, जिनमें से एक भी नहीं चली। हालांकि देर शाम वार्ता सफल रहने पर कर्मचारियों ने हड़ताल खत्म कर दी।
विज्ञापन

लोकल बस स्टैंड के दोनों गेट किए बंद
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा ने मंगलवार को बुधवार सुबह से चक्का जाम किया था। इसके चलते कर्मचारी नेता और यूनियनों से जुड़े सदस्य देर रात 2 बजे बस स्टैंड परिसर में एकत्रित होना शुरू हो गए। 3.40 पर चंडीगढ़ जाने वाली बस को नहीं जाने दिया गया। हालांकि पुलिस प्रशासन की तरफ से बसों को चलाने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो सकें। कर्मचारियों ने लोकल बस स्टैंड के दोनों गेटों को बंद कर दिया। मुख्य गेट के पास धरना लगा कर बैठ गए। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार, परिवहन मंत्री और अंबाला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कर्मचारियों ने एलान किया कि अगर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो वीरवार को भी हड़ताल पर रहेंगे। इस अवसर पर डिपो प्रधान राजबीर दुहन, अजय दुहन, जितेंद्र शर्मा, राजकुमार चौहान, अरुण शर्मा, सुरेश स्याडवा, नरेंद्र खरड, अमित जुगलान, नरेंद्र मुकलान, पवन बूरा, वरिष्ठ नेता सुभाष ढिल्लो, रामसिंह बिश्नोई, सुरेश मलिक, जोगिंदर पंघाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन

भटकते रहे यात्री, जोखिम भरा रहा सफर
रोडवेज चक्का जाम के चलते दिनभर यात्री बसों के लिए इधर से उधर भटकते रहे। बस स्टैंड परिसर में बूथ के सामने निजी बसें खड़ी थीं। बसों की संख्या कम होने और चक्का जाम के चलते यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। हालात ये रहे कि बस आने पर दो से तीन मिनट में ही भर जाती। यात्रियों को अपने गंतव्य तक जाने के लिए बसों की खिड़की में लटक कर सफर करना पड़ा। ग्रामीण रूटों के लिए मारामारी ग्रामीण रूटों पर अक्सर बसों की मारामारी रहती है। चक्का जाम के चलते यह समस्या और विकराल हो गई। रोडवेज की हड़ताल होने के कारण निजी बस संचालकों ने कई ग्रामीण रूटों से दूरी बनाई। जिस रूटों पर निजी बसें चली वे काफी देर के अंतराल पर चली।
दो घंटे से नही मिली बस
सिवानी की रहने वाली सुनीता ने बताया कि वह दोपहर 12 बजे बस स्टैंड परिसर पहुंची थी। पंजाब जाने के लिए दो घंटे से बस का इंतजार कर रही हूं, लेकिन अभी तक कोई बस नहीं आई। ये भी पता नहीं कि किस समय बस आएगी। बच्चों के साथ बस का इंतजार कर रही हूं। निजी बस भी भी आधे रास्ते तक जा रहा है। अगर, बस में आधे रास्ते तक चले जाए तो वहां से आगे बस मिलेगी या नहीं, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।
निजी बसों में पैर रखने को नहीं जगह
शहर के रहने वाले योगेश ने बताया कि वह अपने दोस्त के साथ रोहतक जाने के लिए बस स्टैंड आया था। यहां आने के बाद पता चला कि रोडवेज बस का चक्का जाम है। एक घंटा हो गया रोहतक जाने के लिए बस नहीं आ रही है। अगर, कोई निजी बस आती है तो उसमें पैर रखने को भी जगह नहीं मिलती। यहां पर काफी यात्री बस के इंतजार में बैठे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें