यदि इंसान के सपनों में दम हो तो न मंजिल मुश्किल होती और न ही सपने साकार करने में वक्त लगता है। इसकी मिसाल क्षेत्र के गांव मंढोली खुर्द की बहू बबीता ने कायम कर दिखाई है। धाविका बबीता ने फिलिपींस में आयोजित एशियन मास्टर्स चैंपियनशिप खेलों में इतिहास रच दिया है। बबीता ने दौड़ का मुकाबला जीतकर अपने सपने को साकार कर कामयाबी की इबारत लिखी है। बबीता राजस्थान के गोठया छोटी (गोठडी) की बेटी है और दसवीं तक शिक्षा हासिल की है। बबीता को देश की सीमा पर प्रहरी के तौर पर राज राइफल में तैनात जेसीओ पति कुलदीप गाडोतिया के मार्गदर्शन ने कामयाबी की मिसाल बना दी। वहीं बीमार बेटे ध्रुव व बेटे पंकज ने भी मां के बढ़ते कदमों को हौसला देने में योगदान दिया है।
धाविका बबीता ने कामयाबी का सफर वर्ष 2023 फरवरी में चौधरी देवीलाल स्टेडियम गुरुग्राम में आयोजित 31वीं हरियाणा स्टेट मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में बबीता ने 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर में की दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर कामयाबी का सफर शुरू किया था। साथ ही नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई होने के बाद कोलकाता में आयोजित 43वीं राष्ट्रीय मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ में बबीता ने रजत पदक जीतकर एशियाड मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए अपना टिकट पक्का कर लिया था।
फिलिपींस के शहर कपास तार्लक में आयोजित 22वीं एशिया मास्टर्स चैंपियनशिप में 1500 मीटर, 800 मीटर तथा 400 मीटर दौड़ में क्रमशः रजत व कांस्य पदक जीता है। एशियन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियन बनकर लौटी बबीता ने बताया कि उसके कोच आनंद सिसाय के मार्गदर्शन में यह उपलब्धि हासिल की है। वहीं बबीता की उपलब्धि पर सास फूला देवी, जेठ प्रदीप और जेठानी सुनीता, पिता चंद्रपाल ढाका, माता सुमित्रा और भाई रमेश ढाका ने बधाई दी।