भिवानी। बवानीखेड़ा हलके से तीन बार विधायक एवं मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) रहे रामकिशन फौजी ने 12 साल बाद सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) सीडी कांड में सुप्रीम कोर्ट से बरी होने का दावा किया है। फौजी ने बुधवार को इनेलो पर सीडी कांड के जरिये उनके परिवार व राजनीतिक भविष्य को खत्म करने का आरोप लगाया। साथ ही कांग्रेस पार्टी छोड़ने के भी संकेत दिए हैं।
फौजी ने कहा कि इनेलो इस मामले में वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट गया था। यहां केस लड़ते-लड़ते उनके घर के जेवर, जमीन बिक गई। उन्होंने दावा किया तीन नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें निर्दोष बताते हुए बरी कर दिया है। फौजी ने कहा कि इन 12 सालों में किसी नेता ने मेरा साथ नहीं दिया। केवल राहुल और सोनिया गांधी ने मेरा हौसला बढ़ाया। ये पूरा षड्यंत्र उस समय के नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला व इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष रहे अशोक अरोड़ा ने रचा था और उनके खिलाफ कोर्ट में झूठी गवाही भी दी थी। इनेलो पर मानहानि के सवाल पर पूर्व विधायक ने कहा कि मुझे कुछ करने की जरूरत नहीं। इस दौरान पूर्व सीपीएस ने कांग्रेस छोड़ने की चर्चाओं पर कहा कि राजनीतिक आदमी की चर्चाएं चलती रहनी चाहिए, साथ ही कहा कि आज मैं कांग्रेस में हूं पर कल का पता नहीं।
क्या था मामला
इनेलो ने वर्ष 2013 में तत्कालीन कांग्रेस विधायक एवं सीपीएस रामकिशन फौजी सहित चार-पांच नेताओं की सीएलयू के लिए करोड़ों रुपये मांगने की सीडी जारी की थी। इसमें कांग्रेस के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह भी शामिल हैं। फौजी ने कहा कि इनेलो ने उन पर कभी खानक में मजदूरों की तो कभी किसानों के लिए सुंदर नहर में पानी की मांग उठाने पर केस दर्ज कर जेल भेजने की करवाई। कभी महिला टीचर से आरोप लगवाए तो कभी मर्डर के केस में फंसाया, लेकिन मैं हमेशा केस जीतकर बरी हुआ।
2011 में इनेलो ने सीडी कांड किया था उजागर
इनेलो ने वर्ष 2011 में सीडी बनाई और चुनाव से ठीक पहले वर्ष 2013 में जारी की। इस कांड में फौजी का नाम सामने आया और उन पर सीएलयू को लेकर पांच करोड़ रुपये लेने के आरोप लगे। फिर कहा गया कि रुपये लिए नहीं, मांगे थे। इसके बाद इनेलो ने राज्यपाल से मिलकर जांच की मांग उठाई। राज्यपाल ने लोकपाल से जांच करवाई। इस जांच में फौजी ने निर्दोष पाए जाने का दावा किया। इसके बाद इनेलो हाईकोर्ट चला गया। वहां से भी फौजी ने बरी होने का दावा किया है।