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अंतिम तारीख तक भी सभी स्कूल बसों में नहीं लग सके सीसीटीवी

Sat, 31 Oct 2015 12:33 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला हिसार
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निजी स्कूलों की बसों में सीसीटीवी लगाने की आखिरी तारीख 31 अक्तूबर रखी गई है। मगर अब तक 20 प्रतिशत स्कूलों की बसों में भी सीसीटीवी नहीं लगवाए गए हैं।
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नियमों की सख्ती से पालना करवाने के लिए आरटीए अथॉरिटी के पास ना समय है और ना ही स्टाफ। अधिकारी सिर्फ काम चल रहा है, कहकर अपनी खानापूर्ति कर रहे हैं। इतना ही नहीं अन्य नियमों की भी पालना नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जिसके चलते अभिभावकों में भी रोष है।

कोर्ट ने दिए थे आदेश
कोर्ट के आदेशों के बाद ही सभी स्कूलों की बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश जारी किए गए थे। इसके लिए बाकायदा 31 अक्तूबर अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी।
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पहले तो स्थानीय आरटीए प्रशासन ने स्कूलों तक निर्देश पहुंचाने में ही लेट-लतीफी बरती और अब नियमों की पालना करवाने में भी कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। स्टाफ की कमी के कारण फिलहाल चेकिंग अभियान भी ठंडा छोड़ दिया गया है। सारे दिन में कर्मचारी सिर्फ दफ्तर के कार्यों को ही निपटा पाते हैं। जिससे चेकिंग अभियान को रेगुलर चलाना मुश्किल हो गया है।

कितनों ने लगवाए सीसीटीवी, रिकॉर्ड नहीं
आरटीए अथॉरिटी के पास फिलहाल ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है, जिसमें यह बताया जा सके कि कितने स्कूलों की बसों में सीसीटीवी लग चुके हैं।

अधिकारी कहते हैं कि पासिंग के दौरान चेक करके ही इस बारे में कुछ बताया जा सकता है। वहीं अनुमान के आधार पर ही 20 से 30 प्रतिशत बोल दिया जाता है। सीसीटीवी नहीं लगवाने वाले स्कूलों को भी नोटिस भेजने की बात कही जाती है, मगर नोटिस कब भेजे जाएंगे और कितनों को भेजे जाएंगे, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

दो-तीन पहले ही हुआ है हादसा
निजी स्कूलों की बसों में सभी कानूनों की पालना नहीं की जा रही है। आरटीए प्रशासन भी इस ओर अनदेखी कर रहा है। जिसके चलते हादसे भी बढ़ रहे हैं।

दो-तीन दिन पहले ही नारनौंद क्षेत्र के एक स्कूल की बस का स्टेयरिंग जाम होने की वजह से एक्सीडेंट हो गया था। जिसमें दो बच्चों की मौत हो गई जबकि कई घायल हो गए थे। अभी तक इस मामले में भी आरटीए प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम नहीं उठाए गए हैं।
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स्कूल की बसों में सीसीटीवी लगवाने की प्रक्रिया चल रही है। अभी कितनी बसों में लग गए, यह बताना मुश्किल है। बाकी चेकिंग अभियान भी चलता है। चालान भी किए जाते हैं। फिलहाल स्टाफ की कमी से दिक्कत आ रही है।
हरविंद्र सिंह, इंचार्ज, आरटीए कार्यालय
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