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कैटल वेलफेयर इंडीकेटर: संकेत बता देंगे आंतरिक रूप से कैसी है पशु की सेहत, लुवास के वैज्ञानिक ने किया विकसित

Tue, 28 Oct 2025 09:44 AM IST
नवीन दलाल श्याम नंदन कुमार, हिसार (हरियाणा)

सार

डॉ. अंकित कुमार कहते हैं कि कई बार दूर से देखने से ऐसा लगता है कि जानवर ठीक है। अच्छी तरह से चल-फिर रहा है और तगड़ा भी दिख रहा है, लेकिन परीक्षण के बाद पता चलता है कि ऐसी स्थिति नहीं है। वहीं इसके अतिरिक्त साफ सफाई की कमी वाला पशु भी मजबूत इम्युनिटी वाला निकलता है।
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सांकेतिक - फोटो : संवाद
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विस्तार
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लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) ने ऐसा मॉड्यूल विकसित किया है, जिसमें 20 संकेतकों के माध्यम से पता चल सकेगा कि आपका पशु आंतरिक तौर पर कितना स्वस्थ है। गाय के लिए भारत में विकसित इस तरह के संभवत: पहले कैटल वेलफेयर इंडीकेटर मॉड्यूल को न केवल केंद्र सरकार से कॉपीराइट मिला है, बल्कि इसे बनाने वाले डॉ. अंकित को एक सोसाइटी की कांफ्रेंस में यंग साइंटिस्ट अवार्ड भी दिया गया है।

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डॉ. अंकित कुमार कहते हैं कि कई बार दूर से देखने से ऐसा लगता है कि जानवर ठीक है। अच्छी तरह से चल-फिर रहा है और तगड़ा भी दिख रहा है, लेकिन परीक्षण के बाद पता चलता है कि ऐसी स्थिति नहीं है। वहीं इसके अतिरिक्त साफ सफाई की कमी वाला पशु भी मजबूत इम्युनिटी वाला निकलता है। ऐसे में महज बाहरी आकलन और अनुमान के आधार पर निर्णय लेना पशुपालकों, गोशाला संचालकों और व्यवस्थित तरीके से पशुपालन करने वाले किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा के मार्गदर्शन, अनुसंधान निदेशक डॉ. नरेश जिंदल के सानिध्य में लुवास में विकसित नया मॉड्यूल इन समस्याओं के निदान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। डॉ. अंकित ने बताया कि पशुपालन फायदे का कारोबार है, लेकिन सावधानी नहीं बरती जाए तो नुकसानदायक भी हो सकता है। पशुपालक तभी सफल हो सकता है, जब उसके पास पशु स्वास्थ्य और पशु कल्याण के लिए स्पष्ट वैज्ञानिक मार्गदर्शन हो। यह मॉड्यूल इसी दिशा में किया गया एक प्रयास है। इसमें भौतिक, व्यावहारिक और रक्त-जैव-रासायनिक/प्रतिरक्षात्मक संकेतक के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से पशुओं की सेहत की जांच की जाती है।

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पूरे हरियाणा से सैंपल लेकर किया शोध

लुवास के पशु वैज्ञानिक डॉ. निलेश सिंधु व डॉ तरुण कुमार के निर्देशन में शोध कर रहे डॉ. अंकित कुमार कहते हैं कि उनका असेसमेंट प्रोटोकॉल पूरी तरह से वैज्ञानिक है। पहले भारत में असेसमेंट का इस तरह का कोई प्रोटोकॉल नहीं था। इसके लिए उन्होंने पूरे हरियाणा से सैंपल जुटाए। वैज्ञानिक और सांख्यिकीय माध्यम से विश्लेषित किया और परिणाम निकाला। फिर वैज्ञानिक तरीके से डाटा तैयार किया गया, स्कोरिंग की गई, परिणाम की व्याख्या की गई। तीन साल के शोध के परिणाम स्वरूप एक असेसमेंट प्रोटोकॉल तैयार किया गया।

आगे क्या : विस्तार कार्यक्रम के माध्यम से पशुपालकों तक पहुंचाना है लक्ष्य

कैटल वेलफेयर इंडीकेटर मॉड्यूल की सफलता के बाद अब दूसरा प्रमुख काम इसे किसानों, गोशाला संचालकों और संगठित व असंगठित पशुपालन क्षेत्र तक पहुंचाना है। विस्तार कार्यक्रम, सेमिनार और कार्यशालाओं के माध्यम से इसे किसानों तक पहुंचाया जाएगा।

शोध में आगे क्या
मॉड्यूल विकसित करने के बाद डॉ. अंकित कुमार अब इसे गाय से आगे बढ़ाकर भैंसों तक पहुंचाना चाहते हैं। इस दिशा में वह आगे कार्य करने की तैयारी कर रहे हैं।
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ये हैं पशुओं के स्वास्थ्य और कल्याण के 20 संकेतक

डॉ. अंकित कुमार के मॉड्यूल के तहत पशुओं के स्वास्थ्य और कल्याण के गहन और वैज्ञानिक मूल्यांकन और निगरानी के लिए जिन 20 संकेतकों की व्यवस्था दी गई है, वे निम्न हैं।

चार भौतिक माप संकेतक
1.⁠ ⁠शारीरिक स्थिति स्कोर। मसलन शारीरिक बनावट, फैट की स्थिति, पीछे से अस्थि संचरना की स्थिति।
2.⁠ ⁠बाह्य परजीवी यानी शरीर पर चीचड़ों की संख्या कितनी है।
3.⁠ ⁠त्वचा के घाव और त्वचा परिवर्तन
4.⁠ ⁠पिछले अंगों, थनों और पार्श्वों की गंदगी

दो व्यावहारिक संकेतक
1. ⁠सामान्य स्वभाव: जानवर कैसे प्रतिक्रिया कर रहा है। उसका स्वभाव उग्र है या शांत।
2. ⁠परिहार दूरी/भीड़भाड़ से दूरी, अकेलापन।
3. रक्त-जैव-रासायनिक/प्रतिरक्षात्मक संकेतक: ⁠हीमोग्लोबिन. ⁠पैक्ड सेल वॉल्यूम, ⁠फॉस्फोरस, ⁠ग्लूकोज, ⁠कैल्शियम, ⁠कुल प्रोटीन, ⁠कोलेस्ट्रॉल, ⁠क्षारीय फॉस्फेट, ⁠हैप्टोग्लोबिन, ⁠सीरम एमिलॉयड ए, ⁠फाइब्रिनोजेन, ⁠कोर्टिसोल, ⁠एल्ब्यूमिन और ⁠सी रिएक्टिव प्रोटीन।
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