लुवास के पशु वैज्ञानिक डॉ. निलेश सिंधु व डॉ तरुण कुमार के निर्देशन में शोध कर रहे डॉ. अंकित कुमार कहते हैं कि उनका असेसमेंट प्रोटोकॉल पूरी तरह से वैज्ञानिक है। पहले भारत में असेसमेंट का इस तरह का कोई प्रोटोकॉल नहीं था। इसके लिए उन्होंने पूरे हरियाणा से सैंपल जुटाए। वैज्ञानिक और सांख्यिकीय माध्यम से विश्लेषित किया और परिणाम निकाला। फिर वैज्ञानिक तरीके से डाटा तैयार किया गया, स्कोरिंग की गई, परिणाम की व्याख्या की गई। तीन साल के शोध के परिणाम स्वरूप एक असेसमेंट प्रोटोकॉल तैयार किया गया।
कैटल वेलफेयर इंडीकेटर मॉड्यूल की सफलता के बाद अब दूसरा प्रमुख काम इसे किसानों, गोशाला संचालकों और संगठित व असंगठित पशुपालन क्षेत्र तक पहुंचाना है। विस्तार कार्यक्रम, सेमिनार और कार्यशालाओं के माध्यम से इसे किसानों तक पहुंचाया जाएगा।
शोध में आगे क्या
मॉड्यूल विकसित करने के बाद डॉ. अंकित कुमार अब इसे गाय से आगे बढ़ाकर भैंसों तक पहुंचाना चाहते हैं। इस दिशा में वह आगे कार्य करने की तैयारी कर रहे हैं।
डॉ. अंकित कुमार के मॉड्यूल के तहत पशुओं के स्वास्थ्य और कल्याण के गहन और वैज्ञानिक मूल्यांकन और निगरानी के लिए जिन 20 संकेतकों की व्यवस्था दी गई है, वे निम्न हैं।
चार भौतिक माप संकेतक
1. शारीरिक स्थिति स्कोर। मसलन शारीरिक बनावट, फैट की स्थिति, पीछे से अस्थि संचरना की स्थिति।
2. बाह्य परजीवी यानी शरीर पर चीचड़ों की संख्या कितनी है।
3. त्वचा के घाव और त्वचा परिवर्तन
4. पिछले अंगों, थनों और पार्श्वों की गंदगी
दो व्यावहारिक संकेतक
1. सामान्य स्वभाव: जानवर कैसे प्रतिक्रिया कर रहा है। उसका स्वभाव उग्र है या शांत।
2. परिहार दूरी/भीड़भाड़ से दूरी, अकेलापन।
3. रक्त-जैव-रासायनिक/प्रतिरक्षात्मक संकेतक: हीमोग्लोबिन. पैक्ड सेल वॉल्यूम, फॉस्फोरस, ग्लूकोज, कैल्शियम, कुल प्रोटीन, कोलेस्ट्रॉल, क्षारीय फॉस्फेट, हैप्टोग्लोबिन, सीरम एमिलॉयड ए, फाइब्रिनोजेन, कोर्टिसोल, एल्ब्यूमिन और सी रिएक्टिव प्रोटीन।