हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने कहा कि कम लागत से मशरूम उत्पादन कर युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं। वह एचएयू के सायना नेहवाल कृषि प्रौद्योगिकी, प्रशिक्षण एवं शिक्षा संस्थान ने मशरूम उत्पादन तकनीक पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। शिविर में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के युवा शामिल हुए।
डॉ. कौशिक ने बताया कि मशरूम उत्पादन पर्यावरण-अनुकूल, कम लागत वाला व्यवसाय है, जो विशेष रूप से भूमिहीन युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर प्रदान करता है। पौध रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार चुघ ने मशरूम के पोषण और औषधीय गुणों पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयस्टर मशरूम पौष्टिकता में किसी अन्य मशरूम से कम नहीं है और इसकी उत्पादन लागत मात्र 20–22 रुपये प्रति किलोग्राम है।
प्रशिक्षण के संयोजक डॉ. सतीश कुमार मेहता ने बटन, किंग आयस्टर, ढींगरी, दूधिया मशरूम के साथ शिटाके, कीड़ाजड़ी, गैनोडर्मा और लायन्स माने जैसे औषधीय मशरूम की उत्पादन तकनीक, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीके शर्मा ने मशरूम प्रसंस्करण पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। डॉ. संदीप भाकर ने सरकार की अनुदान योजनाओं की जानकारी दी।
मशरूम लैब प्रभारी डॉ. जगदीप सिंह ने बटन मशरूम उत्पादन की जानकारी साझा की, जबकि सब्जी विभाग के वैज्ञानिक डॉ. विकास कांबोज ने बताया कि उत्पादन के बाद बचा अवशेष जैविक खाद के रूप में उपयोगी है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और फसलों की गुणवत्ता में सुधार होता है। संस्थान नियमित रूप से रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर युवा कौशल विकास में योगदान दे रहा है।