स्टील सिटी के नाम से पहचान बनाने वाले हिसार जिले के उद्यमी स्टील सहित सभी उद्योगों को रफ्तार देने के लिए सस्ती दरों पर बिजली चाहते हैं।
अमर उजाला कॉनक्लेव - 2016 के तहत शुक्रवार को डाबड़ा चौक स्थित पार्क सेंच्युरी होटल में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों से जुड़े उद्यमियों के साथ गेट टू गेदर हुआ।
इस दौरान उद्यमियों ने कहा कि जब तक देश में समान बिजली की दरें नहीं होंगी और चीन से आयातित माल पर ड्यूटी आदि नहीं लगाई जाएगी, तब तक स्टील उद्योगों के अच्छे दिन नहीं आ सकेंगे।
हरियाणा के उद्योगों को रफ्तार देने के लिए पावर के रेट कम करने ही होंगे। इसके साथ ही चीन से टक्कर लेने के लिए वहां की तरह से करों में छूट प्रदान करनी होंगी। इंडस्ट्री को नए आयाम पर ले जाने के लिए कुछ कानूनों में भी बदलाव लाना होगा।
उद्यमियों ने उद्योगों की समस्याओं की जानकारी देते हुए उन्हें दूर करने के सुझाव भी दिए। उन्होंने बताया कि उन्हें एक यूनिट बिजली के लिए 9 से 10 रुपये चुकाने पड़ते हैं, जबकि पड़ोस के राजस्थान में बिजली 7 से 7.25 रुपये यूनिट के हिसाब से मिल जाती है। ऐसे में हरियाणा में उद्योगों को सस्ती बिजली की संजीवनी की जरूरत है।
चीन से मुकाबला मुश्किल हुआ
उद्यमियों ने सबसे बड़ी समस्या चाइना से मिल रही चुनौती को बताया। इंडिया के उद्यमी जिस प्रोडक्ट को 100 रुपये में तैयार करते हैं उसे चीन सभी तरह से टैक्स अदा करने के बाद भी भारत में 90 रुपये में उपलब्ध करा देता है। इसका कारण है वहां टैक्स में कई तरह की छूट।
उद्यमियों के पास बड़े स्केल की यूनिट हैं। सरकार की ओर से नए उद्योग स्थापित करने पर सभी तरह की मदद की जाती है। मेक इन इंडिया को हकीकत में जमीन पर उतारने के लिए जीएसटी को लागू करना चाहिए।
इंस्पेक्टरी राज हो खत्म
उद्यमियों ने इंस्पेक्टरी राज को भी उद्योगों के लिए बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि उद्यमियों के तमाम तरह के चालान कर दिए जाते हैं। किसी तरह की अनुमति के लिए दफ्तर-दर-दफ्तर चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर खराब इंफ्रास्ट्रक्चर भी उद्यमियों के लिए नासूर बना है।
औद्योगिक एरिया में खराब सड़कों से दो चार होना पड़ रहा है। ऐसे स्थानों पर सड़कों के नाम पर केवल गड्ढे ही हैं। सीवरेज की समस्या का समाधान नहीं हो पाता। पानी की आपूर्ति भी कई दिन बाद होती है। बिजली की आपूर्ति को भी लचर हालात में बताया गया।
क्रिमिनल केस से मिले मुक्ति
उद्यमियों की ओर से औद्योगिक इकाई में हादसा होने पर उसे क्रिमिनल केस से मुक्त करने की बात उठाई गई। उन्होंने कहा कि किसी तरह का हादसा होने पर उद्यमी को सजा की बजाए जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए। इंडस्ट्री एक्ट में बदलाव होना चाहिए।