हिसार। केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी) की तरफ से किए गए शोध में सामने आया है कि क्लोन झोटे के सीमन से पैदा हुई भैंस अपनी मां के मुकाबले ज्यादा दूध देती है। हालांकि इस शोध का दायरा काफी सीमित था। अब संस्थान ने इस दायरे को बढ़ाने का फैसला किया है। इसी के तहत अब सीआईआरबी नूंह में यह शोध करेगा। संस्थान की मानें तो नूंह में पैदा हुई कटड़ियां अभी 1.5 से 2 साल की हैं। 6 माह से एक साल में ये गर्भधारण के लिए तैयार हो जाएंगी। इसके बाद उनका शोध शुरू हो जाएगा।
सीआईआरबी के वैज्ञानिकों ने बताया कि सिरसा के डेरे में बने भैंस फार्म में यह शोध किया गया था। चार भैंसों पर एक से चार ब्यांत तक शोध किया गया था। शोध के बाद यह परिणाम निकला कि ये भैंसे अपनी मां के मुकाबले प्रतिदिन एक किलो ज्यादा दूध दे रही हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह फार्म है और यहां उनकी देखरेख ज्यादा होती है, जबकि पशुपालक के पास इससे अलग परिस्थितियां होती है।
नूंह में करवाया 3800 भैसों का कृत्रिम गर्भाधान
सीआईआरबी के मुताबिक उनकी तरफ से नूंह में क्लोन झोटे के सीमन से करीब 3800 भैंसों का एआई (कृत्रिम गर्भाधान) करवाया गया। इस एआई से पैदा हुईं कटड़ियों पर अब यह शोध किया जाएगा। ये कटड़ियां 2.5 से 3 साल की होने पर गर्भ धारण करने के लिए तैयार हो जाएंगी। गर्भ धारण करने के 11 माह बाद उसकी डिलीवरी होती है। इसके बाद वह दूध देना शुरू करती है।
भैंसों के शारीरिक गुणों का किया मिलान
इसके अलावा वैज्ञानिकों ने सामान्य भैंस व क्लोन के झोटे के सीमन से पैदा हुई भैंस के शारीरिक गुणों का मिलान किया गया। इस दौरान दोनों के रंग, त्वचा, कान, पूंछ, थन और खून आदि का मिलान किया गया। इसमें सामान्य भैंसों व क्लोन झोटे के सीमन से पैदा हुई भैंसों के शारीरिक गुणों में कोई अंतर नहीं मिला। वहीं, क्लोन झोटे के सीमन से पैदा हुई भैंसों में किसी तरह की खामियां भी नहीं मिली।
क्लोन तकनीक से नस्ल में सुधार देखने के लिए यह शोध की जा रही है। हालांकि अभी तक सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
डॉ. यशपाल शर्मा, निदेशक, केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान