बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में हिसार में स्थित ओशो ध्यान उपवन में आयोजित मेडिटेशन कैंप में हिस्
हिसार। ओशो ध्यान उपवन में एक दिवसीय ध्यान शिविर आयोजित करके बुद्ध पूर्णिमा धूमधाम से मनाई गई। शिविर में विभिन्न क्षेत्रों से काफी संख्या में साधकों ने हिस्सा लिया। स्वामी संजय व मां सांची ने विभिन्न सत्रों के दौरान जहां महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं से साक्षात्कार करवाया, वहीं ध्यान साधना के महत्व को भी उन्होंने स्पष्ट किया।
इस दौरान साधकों को ध्यान की सरल विधियों का अभ्यास भी करवाया गया। इस अवसर पर गुरु मां अमृत प्रिया का जन्मदिन भी मनाया गया। ध्यान शिविर के दौरान महात्मा बुद्ध की देशनाओं से रूबरू करवाते हुए स्वामी संजय ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने प्रेम, करुणा और अहिंसा पर आधारित मार्ग दिखाकर मानवता को नई ऊंचाइयां प्रदान की। महात्मा बुद्ध कभी यह नहीं कहते कि यह काम बुरा है और यह काम अच्छा है। बुद्ध कहते हैं कि जो बोधपूर्वक किया जाए वह अच्छा है और जो बोधहीनता से किया जाए वह बुरा है।
बुद्ध कोई धार्मिक शिक्षा नहीं देते। वे केवल चाहते हैं कि जो भी हो तुम सहज रहो। बुद्ध ने कहा है कि तुम मुझे अपनी बैसाखी मत बनाना। मेरी बैसाखी के सहारे कितनी दूर चलोगे, मंजिल तक न पहुंच पाओगे। अपनी रोशनी खुद पैदा करो। बुद्ध पूर्णिमा के उपलक्ष्य में ओशो ध्यान उपवन में आयोजित ध्यान शिविर के दौरान साधकों ने महात्मा बुद्ध को नमन किया और उनके दिखाए मार्ग को अपनाने का संकल्प लिया।