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Hisar News: जाट कॉलेज लाइब्रेरी की पुस्तकें अब एक क्लिक पर बताएंगी अपना पता

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संदीप रामायण
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हिसार। सीआरएम जाट कॉलेज हिसार की लाइब्रेरी ऑटोमेशन मोड में हो गई है। अब कॉलेज की पुस्तकें विद्यार्थियों व लाइब्रेरी स्टाफ को एक क्लिक पर खुद अपना पता बताएंगी। लाइब्रेरी में रखीं 50 हजार पुस्तकों पर तरंग वाली चिप लगाई गई है। अगर बगैर प्रोसेस के पुस्तक लाइब्रेरी से बाहर गई तो पुस्तकालय में सायरन बज जाएगा।
लाइब्रेरी का नवीनीकरण पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमार सैलजा द्वारा सांसद निधि से दिए गए 21 लाख रुपये का बजट खर्च हुआ है। लाइब्रेरी को ऑटोमेशन करने वाला जाट कॉलेज जिले का पहला कॉलेज बन गया है। कॉलेज प्रशासन ने 5 हजार विद्यार्थियों को लाइब्रेरी ऑटोमेशन से जोड़ दिया है। यूजी कोर्स व पीजी कोर्स के सभी विद्यार्थियों के डिजीटल आईकार्ड बना दिए गए हैं। इस कार्ड पर बारकोड भी बनाया गया है। विद्यार्थियों व कॉलेज स्टाफ की सुविधा के लिए लाइब्रेरी ऑटोमेशन में एक पुस्तक की 17 बार एंट्री की गई है, ताकि विद्यार्थियों को पुस्तकों को ढूंढने में परेशानी न हो। लाइब्रेरी ऑटोमेशन करने में लाइब्रेरी कमेटी कन्वीनर डॉ. कपेंद्र सिंह, कमेटी सदस्य डॉ. परविंदर दलाल, डॉ. राकेश शर्मा, प्रो. हर्ष लेखा, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. सुशील बजाज व पूरा लाइब्रेरी स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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लाइब्रेरी इंचार्ज सुरेंद्र सूरा ने बताया कि लाइब्रेरी के गेट पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन डिवाइस इंस्टॉल की गई है। लाइब्रेरी के मुख्य कंप्यूटर में कोहा नामक नए सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल किया गया है। संवाद
चिप की तरंगों से बजेगा सायरन
लाइब्रेरी इंचार्ज सुरेंद्र सूरा ने बताया कि लाइब्रेरी के गेट पर रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन डिवाइस इंस्टॉल की गई है। लाइब्रेरी के मुख्य कंप्यूटर में कोहा नामक नए सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल किया गया है। पुस्तकों पर लगाई तरंग छोड़ने वाली चिप कोहा सॉफ्टवेयर से लिंक की गई है। लाइब्रेरी से बाहर पुस्तक ले जाने से पहले उसकी कोहा सॉफ्टवेटर में एंट्री करवानी होगी। अगर कोई विद्यार्थी बगैर एंट्री करवाए पुस्तक को लाइब्रेरी से बाहर ले जाता है तो रेडिया फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन डिवाइस का सायरन बज जाएगा। ये सिस्टम शुरू होने से लाइब्रेरी में पुस्तकों की सुरक्षा बढ़ गई है।
लाइब्रेरी कियोस्क मशीन में होगा पुस्तकों का रिकॉर्ड
लाइब्रेरी में कियोस्क मशीन भी इंस्टॉल की गई है। लाइब्रेरी से पुस्तक लेने के लिए भी इसी मशीन में एंट्री करवानी होगी। मशीन में एंट्री के बाद कोहा सोफ्टवेयर में विद्यार्थी का रिकॉर्ड जमा हो जाएगा। किस विद्यार्थी ने कौन सी पुस्तक ली है व कितनी पुस्तक ले रखी हैं यह रिकॉर्ड भी कियोस्क मशीन में होगा। विद्यार्थियों को दिए गए डिजीटल आईकार्ड को स्कैन करते ही कियोस्क मशीन विद्यार्थी का अकाउंट सर्च कर लेगा व उसकी पूरी डिटेल ओपन हो जाएगी।
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ये हुआ फायदा
- विद्यार्थी अपने सिलेबस की पुस्तकों का कंप्यूटर से ही पता लगा पाएंगे की लाइब्रेरी में है या नहीं।
- एक क्लिक पर पता चलेगा कि कौन से विषय की पुस्तक लाइब्रेरी की किस अलमारी में रखी है।
- विद्यार्थियों के समय की बचत होगी।
- पुस्तक के साथ-साथ उसके लेखक व भाषा के माध्यम की भी जानकारी होगी।
- लाइब्रेरी की सुरक्षा बढ़ी है।
वर्जन:
- लाइब्रेरी ऑटोमेशन होने से विद्यार्थियों व कॉलेज स्टाफ को राहत मिली है। अब एक क्लिक पर ही पता चल जाएगा कि पुस्तक लाइब्रेरी में है या नहीं है। इसके लिए मैं लाइब्रेरी कमेटी व स्टाफ को शुभकामनाएं देती हूं। लाइब्रेरी की सुरक्षा भी बढ़ी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा द्वारा सांसद निधी से जारी किए बजट से यह कार्य हुआ है।
डॉ. नीलम सिंह, प्राचार्य सीआरएम जाट कॉलेज हिसार।
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