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कोरोना से 13 गुना अधिक जानलेवा साबित हुआ ब्लैक फंगस

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कुलदीप जांगड़ा
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हिसार। कोरोना महामारी से ब्लैक फंगस अधिक खतरनाक साबित हो रहा है। ब्लैक फंगस में मृत्यु दर कोरोना से करीब 13 गुना अधिक तेजी से बढ़ रही है। ब्लैक फंगस से अगर जान बच भी गई तो काफी लोगों को अपनी आंख, जबड़ा तक गंवाना पड़ा। वहीं, करीब 40 दिन बाद भी मरीजों को ब्लैक फंगस में कारगर दवा नहीं मिल पा रही है।
जिले में ब्लैक फंगस का पहला मामला 13 मई को आया था। इन मरीजों के लिए अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में विशेष वार्ड बनाया गया है। अब तक यहां 290 मरीज दाखिल हो चुके हैं, जिसमें 76 की मौत हो चुकी है। वहीं, 35 मरीजों ने अंग गंवाए, जिनमें 12 मरीजों की आंख निकाली गई। आंकड़ों के अनुसार ब्लैक फंगस का शिकार हुए हर चौथे मरीज की मौत हुई है। 12 प्रतिशत मरीजों को अपने अंग गवांने पड़े हैं। कुछ मरीजों के आधे जबड़े भी निकाले गए हैं।
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कोरोना की बात करें जिले में अब तक कुल संक्रमित 53870 और ठीक होने वालों की संख्या 52670 है। संक्रमण से 1096 की जान जा चुकी है, यानि मृत्यु दर 2.03 प्रतिशत रही। ठीक होने वाले मरीजों का रिकवरी रेट 97.77 प्रतिशत है। मार्च 2021 में कोरोना की दूसरी लहर शुरू हुई जो पहली के मुकाबले ज्यादा खतरनाक रही। (संवाद)
कोरोना के 104 सक्रिय मरीज...
जिले में बुधवार को कोरोना के 13 नए मामले सामने आए हैं। साथ ही केवल दो मरीजों को स्वस्थ होकर घर लौटे है। बुधवार को अन्य दिनों की अपेक्षा बहुत कम मरीजों को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जया गोयल ने बताया कि फिलहाल जिले में 104 सक्रिय मरीज हैं, जिनमें से अधिकतर होम आइसोलेशन में उपचाराधीन है।
ब्लैक फंगस के 73 मरीज दाखिल...
जिले में ब्लैक फंगस की बात करें तो महाराजा अग्रसेन मेडिकल कॉलेज में 73 मरीज दाखिल हैं। यहां रोजाना औसतन 5 से 6 मरीज आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में 100 बेड का वार्ड बनाया गया है। मरीजों को सरकार की ओर से मिलने वाली दवा नहीं मिल पा रही है। 40 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार दवा का प्रबंध नहीं कर पा रही।
ब्लैक फंगस का इलाज भी लंबा
चिकित्सकों के अनुसार ब्लैक फंगस का उपचार छह महीने तक चलेगा। छुट़्टी लेकर घर जा चुके मरीजों को भी समय समय पर आना होगा। यहां इंजेक्शन, दवाई लेनी होगी। नियमित समय पर जांच कराना अनिवार्य होगा। फंगस फैलती मिली तो फिर से ऑपरेशन कराना होगा।
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ब्लैक फंगस के मरीजों को बचाने के लिए हमारी टीम भरसक प्रयास कर रही है। रोजाना 10 से 12 ऑपरेशन किए जा रहे हैं। हमारा स्टाफ बिना अवकाश लगातार ड्यूटी देते हुए ऑपरेशन कर रहा है। देर रात तक ऑपरेेशन चलते हैं। दवा की कमी उपचार में बाधक बनी। ब्लैक फंगस मरीजों के लिए खतरनाक है। - डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफेसर, दंत विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा
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