ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस लगातार जानलेवा साबित हो रहा है। सोमवार को चार संक्रमितों ने दम तोड़ दिया तो पांच नए केस सामने आए। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में 3 दिन से लगातार हर रोज ब्लैक फंगस के मरीज का पूरा जबड़ा निकालना पड़ रहा है। जबड़े में फंगस फैलने के कारण गलन शुरू हो गई थी। चिकित्सकों को जबड़ा निकालने का फैसला लेना पड़ा। ओरल सर्जन डॉ. बंसीलाल बेनीवाल के निर्देशन में ओरल सर्जन डॉ. कन्नू प्रिया के साथ दंत विभाग की पूरी टीम ऑपरेशन में सहयोग कर रही है। मेडिकल कॉलेज में दाखिल करीब 15 मरीजों के जबड़ो के ऑपरेशन करना बाकी हैं।
सोमवार को भी एक मरीज का जबड़े का ऑपरेशन होना था। ऑपरेशन से पहले बुजुर्ग छुट्टी लेकर घर चला गया। बताया जा रहा है कि मरीजों को ऑपरेशन के बाद दवा ना मिलने का डर सता रहा है। कहीं ऑपरेशन के बाद दवा नहीं मिली तो जान को खतरा ना बन जाए। मेडिकल कॉलेज में दवा की काफी कमी चल रही है।
सोमवार को मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के 5 नए मामले पहुंचे हैं। म्यूकरमाइकोसिस वार्ड में ब्लैक फंगस के 78 मरीज दाखिल हैं। इनमें छह संदिग्ध है। सोमवार को ब्लैक फंगस के कारण 4 मरीजों की मौत हुई है। मौत का आंकड़ा 45 तक पहुंच गया है।
बढ़ नहीं रहे तो कम भी नहीं हो रहे मरीज
प्रोफेसर डॉ. अनूप ग्रोवर का कहना है कि इस समय म्यूकरमाइकोसिस के केस अधिक नहीं बढ़ रहे हैं तो मरीज कम भी नहीं हो रहे हैं। कोरोना के साथ-साथ फंगस के मरीजों की संख्या में भी गिरावट आएगी।
आते ही दवा का भंडारण हुआ खत्म
सोमवार को अस्पताल में केवल 79 इंजेक्शन पहुंचे है। वार्ड में दाखिल मरीजों को केवल एक-एक इंजेक्शन ही लग पाया है। 2 दिन से मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस इलाज में कारगर इंजेक्शन और दवा का भंडारण खत्म था। अब 79 इंजेक्शन मिले जो आते ही खत्म हो गए। मरीजों को फंगस का अधिक खतरा भी बढ़ गया है।
ब्लैक फंगस के 9 ऑपरेशन हुए
अस्पताल में विभाग और नेत्र रोग विभाग की टीम ने मिलकर सोमवार को 9 मरीजों के ऑपरेशन किए हैं। इनमें से 5 मरीजों के आंखों के और 4 मरीजों के नाक के ऑपरेशन किए हैं। इन मरीजों में भी फंगस फैल रही थी।
4 से 5 घंटे का समय लगता है 1 मरीज के ऑपरेशन में
ओरल सर्जन डॉ. बंसीलाल बेनीवाल का कहना है कि अब इन दिनों बड़े ऑपरेशन हो रहे हैं। इस लिए एक मरीज के जबड़े के ऑपरेशन में 4 से 5 घंटे का समय लगता है। ऑपरेशन के बाद भी मरीज को वेंटिलेटर पर रखते हैं। उसका ऑक्सीजन लेवल सामान्य होने पर ही वेंटिलेटर से हटाया जाता है। तब तक उसकी निगरानी रखनी पड़ती है।
सोमवार को मरीज का बड़ा ऑपरेशन था। इस लिए मरीज का जबड़ा निकालने में काफी समय लगा। अभी भी काफी ऑपरेशन करना बाकी है। इसमें दवा भी काम आ रही है। सोमवार को मरीजों को केवल एक-एक इंजेक्शन लग पाए है।
डॉ. अनूप ग्रोवर, प्रोफेसर, दंत विभाग, मेडिकल कॉलेज, अग्रोहा।
म्यूकर माइकोसिस (ब्लैक फंगस) बीमारी के लक्षण महसूस होते ही यदि उपचार आरंभ हो जाए, तो इस बीमारी से जल्द रिकवरी की संभावनाएं काफी बढ़ जाती है, इस लिए जिन भी लोगों को इस बीमारी के लक्षण महसूस होते हैं, तो वह जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेकर अपना उपचार आरंभ करवाएं।
डा. रत्ना भारती, सिविल सर्जन, हिसार।
अब तक 212 मामले आए, 24 ठीक हुए
अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में अब तक 212 मामले आए हैं। 100 मामले हिसार और 112 मामले हिसार से बाहर के जिलों से संबंधित है। हिसार में 162 मरीज उपचाराधीन है। 24 मरीज अभी तक इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं।