ब्लू बर्ड पर्यटन केंद्र में बर्ड फ्लू का एच5 एन8 वायरस साइबेरियन पक्षियों के जरिए बतखों में पहुंचा है। पशुपालन विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि माइग्रेट बर्ड ही इसका माध्यम है। हजारों किलोमीटर दूर से आने वाले माइग्रेट बर्ड भतरपुर झील में इस वक्त जाते हैं। इस दौरान ये पक्षी आते जाते समय इन छोटी झीलों पर ठहरते हैं। साइबेरियन पक्षी जब स्थानीय पक्षियों के टच में आते हैं तो ये वायरस इन तक पहुंच जाता है। डक (बतख) में ये वायरस सबसे ज्यादा असर करता है, जिसके माध्यम से मनुष्य में यह वायरस पहुंच जाता है।
डक में वायरस की चेन तोड़ना सबसे ज्यादा जरूरी
पशुपालन विभाग के डॉक्टरों ने बताया है कि डक में वायरस तेजी से फैलता है। इसके माध्यम ये मनुष्य तक पहुंच सकता है। टीम सदस्यों का कहना है कि इसलिए डक में वायरस की चेन तोड़ना सबसे अधिक जरूरी था।
विभाग जारी करेगा सेनीटाइजेशन सर्टिफिकेट
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक से दो दिन के अंदर विभाग सेनीटाइजेशन सर्टिफिकेट जारी करेगा। इसको लेकर बुधवार को डीजी जीएस जाखड़ से बात की जाएगी। उनके निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जब तक नेगेटिव रिपोर्ट नहीं आती जारी रहेगी सैंपलिंग
बर्ड फ्लू को लेकर हर 15 दिन बाद सैंपलिंग होती रहेगी। जब तक नेगिटिव रिपोर्ट नहीं आती सैंपलिंग जारी रहेगी। झील के पानी की भी सैंपलिंग होगी। लगातार झील में लाल दवाई का छिड़काव जारी है। इसके अलावा टीम की निगरानी में है कि कहीं कोई ऐसा पक्षी तो नहीं जो बर्ड फ्लू की चपेट में आया हो।
माईग्रेट होकर आने वाले पक्षियों के माध्यम से बर्ड फ्लू का वायरस यहां तक पहुंचा है। माईग्रेट बर्ड साइबेरिया से आने वाले भरतपुर झील तक जाते हैं। रास्ते में जब ये थक जाते हैं तो इन झीलों पर ठहर जाते हैं। लोकल बर्ड के संपर्क में आने से ये वायरस यहां छोड़ जाते हैं।
- एलसी रंगा, नोडल ऑफिसर, ब्लू बर्ड ऑपरेशन