निजी अस्पताल बायोमेडिकल कचरे का सही तरह से निष्पादन नहीं कर रहे हैं। नगर निगम ने अभी तक 23 अस्पतालों का निरीक्षण किया है, जिनमें से 22 अस्पतालों के सामान्य कचरे में बायोमेडिकल कचरा भी शामिल पाया गया है।
निगम की तरफ से इन सभी अस्पतालों के चालान किए जा चुके हैं। अब निगम प्रशासन ने शहर के सभी अस्पतालों के साथ बैठक करने का फैसला किया है। यह बैठक 31 मार्च को होगी। बैठक की अध्यक्षता निगम संयुक्त आयुक्त बेलिना करेंगी। बैठक में बायोमेडिकल कचरे को लेकर अस्पतालों को जरूरी दिशानिर्देश दिए जाएंगे।
बता दें कि नगर निगम प्रशासन को काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं कि निजी अस्पताल बायोमेडिकल कचरे के निष्पादन को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। यही नहीं अस्पताल निगम प्रशासन को दिए जाने वाले सामान्य कचरे में ही बायोमेडिकल कचरा मिला कर दे रहे हैं। इसी को देखते हुए निगम प्रशासन की तरफ से यह जांच अभियान चलाया।
गाइडलाइन की जानकारी दी जाएगी
31 मार्च को होने वाली बैठक में निजी अस्पताल संचालक भाग लेंगे। खासतौर पर जिन अस्पतालों से काफी मात्रा में बायोमेडिकल कचरा निकलता है। बैठक में अस्पताल संचालकों को स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि किसी भी सूरत में सामान्य कचरे में बायोमेडिकल कचरा मिला नहीं होना चाहिए, अन्यथा निगम की तरफ से अस्पताल पर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में बायोमेडिकल कचरे को लेकर जारी गाइडलाइन की भी जानकारी उन्हें दी जाएगी।
शहर में चल रहे हैं करीब 250 अस्पताल
वर्तमान में शहर भर में करीब 250 निजी अस्पताल हैं। इन अस्पतालों से प्रतिदिन कई टन बायोमेडिकल कचरा निकलता है। नियमानुसार बायोमेडिकल कचरे को सामान्य कचरे में नहीं मिलाया जा सकता है और इसका अलग से निष्पादन करना जरूरी होता है। मगर अस्पताल संचालक इन नियमों को पूरी तरह से पालन नहीं करते।
बायो मेडिकल कचरे से फैल सकती हैं गंभीर बीमारियां
स्वास्थ्य व पर्यावरण दोनों के लिहाज से बायोमेडिकल कचरा खतरनाक है। इससे न सिर्फ गंभीर बीमारियां फैलती हैं, बल्कि पर्यावरण भी दूषित होता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस कचरे से एचआईवी व हेपेटाइटिस जैसी बीमारी होने का भी डर रहता है। बायोमेडिकल कचरे के निष्पादन को लेेकर नियम भी बनाए गए हैं। इन नियमों का पालन न करने पर जुर्माना व सजा दोनों का प्रावधान है।
निगम प्रशासन व निजी अस्पताल संचालकों की बैठक 31 मार्च को तय की गई है। संयुक्त आयुक्त बेलिना की अध्यक्षता में यह बैठक होगी।
-देवेंद्र बिश्नोई, सीएसआई, नगर निगम।