देश के सबसे प्रगतिशील 100 किसान अब देश के अन्य किसानों को प्रोफेसर बनकर गो आधारित प्राकृतिक खेती के लिए प्रशिक्षण देंगे। ये प्रशिक्षक किसान 31 मार्च तक देश के 15 हजार किसानों को प्रशिक्षण देंगे। प्रत्येक किसान 31 मार्च तक 30-30 किसानों के 5 प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगा। प्रत्येक शिविर के लिए प्रशिक्षक किसान को आईसीएआर 1 लाख रुपये देगी। आईसीएआर ने इसके लिए एक व्यापक योजना बनाई है।
आईसीएआर ने लुवास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. जगबीर रावत के नेतृत्व में पंडित दीनदयाल उपाध्याय उन्नत कृषि शिक्षा योजना तैयार की है। इस योजना के अंतर्गत देश के 100 प्रगतिशील किसानों को अन्य किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए चुना गया है। ये वे किसान हैं, जो उन्नत खेती करने के लिए देशभर में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं। ये प्रशिक्षक किसानों को साधारण भाषा में गो आधारित जीरो बजट खेती करने का प्रशिक्षण देंगे। मंगलवार को योजना के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. जगबीर रावत ने हिसार के गांव भगाणा में गो रक्षा अधिरक्षणी हवन व किसानों के साथ बैठक कर इसकी शुरुआत की।
उन्होंने कहा कि देश की पहली गोशाला बनाने वाले स्वामी दयानंद की जयंती पर इस योजना की शुरुआत उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस योजना को देशभर में लागू किया जाएगा। किसानों की एक कंपनी द्वारा भगाना में जल्द ही एक गो कृषि अधिरक्षणी संस्थान की स्थापना भी की जाएगी। जो किसानों को गो आधारित जीरो बजट खेती के प्रचार व किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए काम करेगा।
हरियाणा के हैं 2 प्रशिक्षक किसान
इन 100 प्रशिक्षक किसानों में हरियाणा के 2 किसानों को शामिल किया गया है। इनमें कुरुक्षेत्र के किसान राजकुमार आर्य और हिसार के कृष्ण कुमार शामिल हैं। प्रशिक्षण व्यवस्था और प्रशिक्षण को धरातल पर जोड़ने के लिए आईसीएआर प्रत्येक प्रशिक्षक किसान को 5 प्रशिक्षण शिविरों के लिए 5 लाख रुपये देगा। प्रत्येक प्रशिक्षक 31 मार्च तक 150 किसानों को ट्रेनिंग देगा।
कृषि शिक्षा योजना का सिलेबस भी तैयार
डॉ. रावत ने बताया कि अक्टूबर 2014 में आईसीएआर में गो रक्षा को लेकर एक नेशनल वर्कशॉप का आयोजन हुआ था, जिसमें उनके एक प्रस्ताव को अप्रूव किया गया था। इसके बाद गाय बचाने व उन्नत कृषि शिक्षा योजना बनाई गई। इस कृषि शिक्षा योजना का सिलेबस भी तैयार कर लिया गया है। योजना में सभी चीजें भारतीय परंपरा और संस्कृति पर आधारित हैं।
एक वर्ष तक का पायलट प्रोजेक्ट
डॉ. रावत ने बताया कि 31 मार्च के बाद योजना का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा, जिसमें देश के अन्य किसानों को प्रशिक्षक के तौर पर शामिल कर प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाया जाएगा। यह योजना एक वर्ष तक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाई जाएगी। 29 मार्च को हरियाणा के एक गांव में पहले चरण का समापन समारोह हरियाणा किसान आयोग व एचएयू के साथ मिलकर आयोजित किया जाएगा।