हिसार में नए साल से 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाली पॉलिथीन पर प्रतिबंध लागू हो गया है। अगर कोई व्यक्ति इस मोटाई तक की पॉलिथीन का निर्माण, इस्तेमाल या स्टॉक करता है तो उस पर 500 से 25 हजार रुपये तक का जुर्माना किया जा सकता है। अभी तक 75 माइक्रोन से कम मोटाई वाली पॉलिथीन पर रोक थी। इसके अलावा 19 तरह के एकल उपयोग प्लास्टिक (सिंगल यूज प्लास्टिक) पर भी पूर्ण रूप से प्रतिबंध लग चुका है।
बता दें कि प्रदेश सरकार की तरफ से पिछले वर्ष 25 फरवरी को अधिसूचना जारी की गई थी। इस अधिसूचना के अनुसार 1 एक जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक की 19 आइटमों व 75 माइक्रॉन से कम मोटाई वाली पॉलिथीन के विनिर्माण, विक्रय, वितरण भंडारण, परिवहन व उपयोग पर रोक रहेगी।
सिंगल यूज प्लास्टिक की इन आइटम पर लगाया जा चुका है प्रतिबंध
सिंगल यूज प्लास्टिक के बने ईयर बड, बैलून स्टिक, झंडे, लॉलीपॉप की स्टिक, आइसक्रीम की स्टिक, प्लेट, कप, गिलास, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, ट्रे सहित मिठाई के डिब्बे पर लगने वाली पन्नी, निमंत्रण पत्र, सिगरेट पैकेट, थर्मोकॉल का सजावटी सामान, पीवीसी बैनर व 75 माइक्रॉन तक के पॉलिथीन।
इस प्रकार है जुर्माने का प्रावधान
- 100 ग्राम तक 500 रुपये
- 101 से 500 ग्राम तक 1500 रुपये
- 501 ग्राम से एक किलोग्राम तक 3 हजार रुपये
- 1.1 किलोग्राम से 5 किलोग्राम तक 10 हजार रुपये
- 5.1 किलोग्राम से 10 किलोग्राम तक 20 हजार रुपये
- 10 किलोग्राम से ज्यादा पर 25 हजार रुपये
इन्हें सौंपी कार्रवाई की जिम्मेदारी
- जिला मजिस्ट्रेट
- नगर निगम आयुक्त
- जिला नगरपालिका आयुक्त
- अपर आयुक्त
- जिला विकास पंचायत अधिकारी
- उपमंडल मजिस्ट्रेट
- नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी
- नगरपालिका समिति सचिव
- नगर निगम सहायक आयुक्त
- जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता
- जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक
- सहायक खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक
- जिला नगर योजनाकार
- संपदा अधिकारी एचएसवीपी
- खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी
- तहसीलदार
- नायब तहसीलदार
- क्षेत्रीय अधिकारी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
पर्यावरण को होगा फायदा
पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो. नरसीराम बिश्नोई के अनुसार सूखे कचरे की बात की जाए तो उसमें पॉलिथीन व एक उपयोग प्लास्टिक काफी मात्रा में होता है, जो पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदायक है। सरकार के इस फैसले से सूखे कचरे में कमी आएगी। हालांकि इस तरह से परिणाम के लिए कम से कम एक-दो साल तक इंतजार करना होगा।
चालान के नाम पर हो रही खानापूर्ति
जब प्रदेश सरकार ने एकल उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया था तो शुरुआत में नगर निगम ने चालान अभियान में तेजी दिखाई थी। मगर बाद में यह धीमा पड़ गया और काफी समय तक यह बंद भी रहा। हालांकि अब फिर से अधिकारियों ने चालान अभियान शुरू किया है। उधर नगर निगम के अलावा अन्य कोई भी विभाग चालान नहीं कर रहा है, जबकि निगम के अलावा अन्य विभागों के 12 अधिकारियों को भी चालान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।