सेक्टर की ग्रीन बेल्ट में बनाई गई कार पार्किंग।
हिसार। एक तरफ शहर में हरियाली कम होती जा रही है तो दूसरी तरफ पेड़-पौधों के लिए आरक्षित जमीन (ग्रीन बेल्ट) में भी हरियाली विकसित करने के बजाय अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि कहीं ग्रीन बेल्ट में बैठने के लिए शेड बना रखे हैं तो कहीं गाड़ियों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है। उधर, संबंधित विभाग के अधिकारियों ने इन अवैध निर्माण को लेकर चुप्पी साध रखी है।
बता दें कि नगर निगम आंकड़े के अनुसार शहर में करीब 61 ग्रीन बेल्ट हैं। ये ग्रीन बेल्ट शहर के मुख्य मार्गों के साथ-साथ सेक्टर में बनी हुई हैं। नियमानुसार ग्रीन बेल्ट का इस्तेमाल सिर्फ हरियाली के लिए ही किया जा सकता है। अगर ग्रीन बेल्ट एरिया का इस्तेमाल अन्य किसी कार्य के लिए किया जाता है तो वह पूरी तरह अवैध है।
एचएसवीपी के सभी सेक्टरों में ग्रीन बेल्ट का प्रावधान होता है। ग्रीन बेल्ट में ज्यादातर अवैध निर्माण भी इन्हीं क्षेत्रों में किए हैं। सेक्टरवासी अपनी निजी कार्य के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। कहीं मकानों का मलबा डाला जा रहा है तो कहीं आने-जाने के लिए रास्ता बना रखा है। इसके अलावा कहीं ग्रीन बेल्ट में शेड बनाकर गाड़ियां खड़ी की जा रही हैं।
जिले व शहर में हरियाली की स्थिति
शहर का विकास होने के साथ-साथ हरियाली भी कम होती जा रही है। सड़कों को चौड़ा करने व पुल आदि बनाने के लिए काफी संख्या में पेड़ काटे गए हैं। वन विभाग की मानें तो जिले में करीब 1.45 प्रतिशत ही हरियाली है। अगर शहर की बात करें तो यह आंकड़ा एक प्रतिशत से कम होगा। जिले का क्षेत्रफल 3983 वर्ग किलोमीटर है। वन नीति के अनुसार एक तिहाई क्षेत्र में वन होने चाहिए। इस हिसाब से 1256 वर्ग किलोमीटर में वन होने चाहिए, लेकिन अभी 733 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र की जरूरत है।
जिंदल चौक पर ग्रीन बेल्ट में बना था सरकारी कार्यालय, निगम ने चलवाई थी जेसीबी
शहर के जिंदल चौक पर स्थित ग्रीन बेल्ट पर काफी वर्षों तक कब्जा रहा था। यहां ग्रीन बेल्ट में जनस्वास्थ्य विभाग का कार्यालय तक बना हुआ था। करीब दो वर्ष पहले ही निगम ने इस ग्रीन बेल्ट में हुए अवैध कब्जों पर कार्रवाई की थी। इस दौरान विभाग का कार्यालय का भवन भी तोड़ दिया गया था और इस ग्रीन बेल्ट की चहारदीवारी करवाई गई थी।
सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट में अगर कब्जे हैं तो इस बारे में एचएसवीपी के संबंधित अधिकारी से सर्वे करवाया जाएगा। इन सभी अवैध निर्माण को हटवाया जाएगा। - प्रदीप दहिया, निगमायुक्त, नगर निगम