फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जहां तबादला होता है, वहीं सैकड़ों पौधे लगा देते हैं ग्रीन मैन एएसआई तेलुराम बिश्नोई

विज्ञापन
पौधा लगाते एएसआई तेलुराम बिश्नोई (दाएं)। - फोटो : Hisar
विज्ञापन
संदीप बिश्नोई
विज्ञापन

हिसार। बचपन से पौधे लगाने का शौक, लेकिन संसाधनों का अभाव। युवावस्था में जब पुलिस की नौकरी मिली तो परिजनों को उनकी नौकरी की खुशी थी, लेकिन तेलुराम बिश्नोई को इससे अधिक खुशी इस बात की थी कि अब पौधे लगाने और जीवों की रक्षा में संसाधनों की कमी आड़े नहीं आएगी। पुलिस की नौकरी ज्वाइन करने से लेकर आज तक जहां-जहां उनका तबादला हुआ, वहां कोई स्कूल, गोशाला और सार्वजनिक स्थान नहीं छोड़े, जहां एएसआई तेलुराम ने पौधे नहीं लगाए हों। अब तक 30 हजार पौधे लगा चुके हैं।
हिसार विजिलेंस में एएसआई तेलुराम बिश्नोई बताते हैं कि बिश्नोई पंथ की स्थापना करने वाले गुरु जंभेश्वर महाराज ने कहा था... जीव दया पालनी, रूंख लीलो नहीं ध्यावै। यानी जीवों पर दया करो और हरे पेड़ न काटो, न काटने दो। बचपन में सुनी इन पंक्तियों को अपने जीवन में उतारने वाले तेलुराम आज तक नहीं भूले। वे कहते हैं कि पर्यावरण को बचाना है तो पर्यावरण प्रेम संस्कारों में होना जरूरी है।
विज्ञापन

स्वयं की नर्सरी बनाई, मानसून में लगाएंगे 5 हजार पौध
आदमपुर क्षेत्र में तेलुराम को ग्रीन मैन के नाम से जाना जाता है। पर्यावरण से प्रेम इतना कि मानसून में पौधे लगाने के लिए अपने वेतन से ही स्वयं की 5 हजार पौधों की नर्सरी तैयार कर ली। वे पहले ही चिह्नित कर चुके विभिन्न स्थानों पर ये पौधे लगाएंगे।
चार एकड़ में जंगल बनाने के लिए गोशालाओं ने दी जमीन
वन्य प्राणियों के लिए जंगल बनाने के लिए तेलुराम बिश्नोई ने कई जगहों पर गोशाला संचालकों से प्रार्थना की। उनके इस निवेदन पर उन्हें आदमपुर गौशाला ने एक एकड़, कालीरावण गोशाला ने एक एकड़ और जोधपुरे में जाम्भा गोशाला ने 2 एकड़ जमीन जंगल बनाने के लिए दी है। ये जंगल वे अपने खर्च पर बनाएंगे।
विज्ञापन

तोशाम में बताई बिश्नोई समाज के 363 लोगों की कहानी तो चला ग्रीन आंदोलन
मूल रूप से आदमपुर क्षेत्र के कालीरावण गांव निवासी एएसआई तेलुराम बिश्नोई बताते हैं कि वर्ष 2014 में जब उनकी पोस्टिंग तोशाम हुई तो वहां पेड़ों का अभाव था। लोग भी इस संबंध में कम जागरूक थे। वहां गोशाला और अन्य स्थानों पर उन्होंने पौधे लगाने के लिए जगह मांगी तो लोगों ने उनसे ही इस रुचि का कारण पूछा। उन्होंने गुरु जंभेश्वर महाराज के नियमों और पेड़ों को कटने से बचाने के लिए खेजड़ली में शहीद हुए 363 बिश्नोइयों का इतिहास बताया। इससे प्रभावित हुए लोगों ने उन्हें न केवल पौधे लगाने के लिए जगह दी, बल्कि लोगों ने भी उनके साथ मिलकर बड़ी संख्या में पौधे लगाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें