हिसार। लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सेना देशभर में 20 वेटर्न अस्पताल बनाएगी। इसके साथ ही चलने में असमर्थ पूर्व सैनिकों को घर पर ही दवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। ब्लॉक स्तर पर कुछ वाॅलंटियर नियुक्त करेंगे, जो पेंशनर्स को घर पर ही मेडिकल सहायता घर पहुंचाएंगे। मनजिंदर सिंह शनिवार को आर्मी कैंट में आयोजित पूर्व सैनिकों की रैली में संबोधित कर रहे थे। रैली में प्रदेश के 10 जिलों से पूर्व सैनिक पहुंचे थे। इस मौके पर वीरांगनाओं और पूर्व सैनिकों को सम्मानित भी किया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने कहा कि अभी सेना ने निजी अस्पतालों को पैनल पर लिया हुआ है। मगर सेना खुद के अस्पताल बनाना चाहती है। यह प्रोजेक्ट सफल होता है तो ईसीएचएस का पूरा सिस्टम बदल जाएगा। उन्होंने बताया कि अब पेंशन सिस्टम ‘स्पर्श प्लेटफार्म’ पर स्थानांतरित कर दिया गया है। पुराने सिस्टम में पेंशन में देरी होती थी। शुरुआती दिनों में कुछ समस्याएं आई थीं, लेकिन अब 99 प्रतिशत दिक्कतों का समाधान कर दिया गया है। कुछ पेंशनर्स दस्तावेज नहीं दे पाए हैं जिस कारण प्रक्रिया अटकी है। सेना और स्पर्श टीम मिलकर 100 प्रतिशत माइग्रेशन का लक्ष्य पूरा करने में जुटी है। उन्होंने कहा कि कमांड की ओर से वेटर्न अचीवर अवाॅर्ड की शुरुआत की गई है, जो राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले वेटर्न को दिया जाएगा।
एकीकृत सैनिक सदन का कार्य प्रगति पर : राव नरबीर
मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सैनी को आना था लेकिन वे किन्हीं कारणों से नहीं आ सके। उन्होंने कहा हरियाणा छोटा सा प्रदेश है लेकिन सबसे ज्यादा सैनिक हरियाणा के हैं और सबसे ज्यादा शहादत भी इस प्रदेश के सैनिकों ने ही दी है। वित्त वर्ष 2025-26 सैनिक व अर्धसैनिक कल्याण विभाग के लिए 135 करोड़ रुपये का बजट का प्रावधान किया गया है। अक्तूबर 2014 से आज तक शहीदों के 418 आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी गई है। उन्होंने कहा, प्रदेश के 8 जिलों में एकीकृत सैनिक सदन बनाए जाएंगे। इसका कार्य प्रगति पर है। सभी अग्निवीरों को नौकरी भी दी जाएगी। उन्हें नियमित सैनिकों की तरह वीरता व विशिष्ट सेवा पदक पाने पर नकद पुरस्कार दिया जाएगा। शहीद सैनिकों के हर बच्चे को 6 से 12वीं कक्षा तक 60 हजार रुपये, स्नातक तक 72 हजार और स्नातकोत्तर तक 96 हजार रुपये प्रति वर्ष देने पर काम चल रहा है।
पति ड्यूटी के दौरान शहीद, अब बेटा-बेटी को सेना में भेजेंगी
रैली के दौरान सम्मानित होने वाली जिले के गांव संडोल निवासी वीरांगना निशा ने बताया किपति सोमबीर सिंह वर्ष 2023 में सिक्किम में तैनात थे। 23 दिसंबर को हिमस्खलन के दौरान उनका पूरा ग्रुप हिमस्खलन की चपेट में आ गया। करीब 24 घंटे के बाद पति का शव बरामद किया जा सका। मुझे 2 दिन बाद पता चला कि पति शहीद हो चुके हैं। इस हादसे से एक दिन पहले ही मेरी फोन पर उनसे बातचीत हुई थी। उन पर परिवार की कई जिम्मेदारियां थीं, जिनको पूरा करने के लिए वह कह रहे थे। निशा ने बताया कि मेरे एक बेटा और एक बेटी है। पति बेटे को सेना में भेजना चाहते थे। मगर मैं दोनों को ही सेना में भेजूंगी।
सेना में भर्ती होते ही युद्ध में लिया हिस्सा, यूनिट को मिले दो परमवीर चक्र
गांव सातरोड निवासी रिसालदार आजाद सिंह ने बताया कि वह वर्ष 1971 में सेना में भर्ती हुए थे। उसी समय पाकिस्तान से युद्ध शुरू हो गया। मेरा काम सैनिकों तक युद्ध सामग्री पहुंचाना था। ऐसा करने के दौरान ही एक बम मेरे पास आकर गिरा, जिससे छर्रे मेरी जांघ में लगे और मैं घायल हो गया। मैंने हिम्मत नहीं हारी और युद्ध सामग्री को अपने साथियों तक पहुंचाया। इस युद्ध में हमने पाकिस्तान को नाको चने चबवा दिए। मेरी यूनिट के दो सैनिकों को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
पूर्व सैनिकों की शिकायतों का किया समाधान
रैली में पूर्व सैनिकों की शिकायतों के निवारण, दस्तावेज नवीनीकरण, पेंशन संबंधी प्रश्नों और रोजगार के अवसरों में सहायता के लिए हेल्प डेस्क और स्टॉल स्थापित किए गए, जिनके माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान किया गया। मिलिट्री अस्पताल, हिसार के तत्वावधान में आयोजित चिकित्सा शिविर में स्वास्थ्य जांच की गई। वीरांगनाओं, वीर माताओं और युद्ध में घायल पूर्व सैनिकों को राष्ट्र के प्रति उनकी विशिष्ट सेवा और बलिदान के लिए सम्मान चिह्न प्रदान किए गए। विकलांग पूर्व सैनिकों को 13 ई-स्कूटर, सहायक उपकरण और वित्तीय सहायता प्रदान की गईं।