हिसार। एसपी मोहित हांडा ने कहा कि साइबर अपराधी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं क्योंकि आजकल लोग सोशल मीडिया का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑनलाइन खरीदारी या खाते से रुपये ट्रांसफर करने के लिए मोबाइल एप का इस्तेमाल कर रहे हैं। मोबाइल पर एनीडेस्क एप डाउनलोड करने के लिए लिंक आए तो उस पर क्लिक करने से बचें। यह एप बैंक खाते के लिए घातक हो सकता है। साइबर अपराधी आजकल ठगी के लिए एनीडेस्क एप का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं।
एसपी ने कहा कि साइबर अपराधी रोजाना धोखाधड़ी कर रहे हैं। रुपये हड़पने के लिए वह नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। आप किसी भी दूरस्थ डेस्कटॉप एप को अपने डिवाइस में डाउनलोड न करें। किसी भी व्यक्ति को अपनी आईडी, पासवर्ड, पिन, खाता संख्या आदि की जानकारी न दें।
उन्होंने एनीडेस्क नाम के एक रिमोट डेस्कटॉप एप के खतरे बताए। कहा कि एनीडेस्क एप ठगों के लिए सरल साधन है। यह उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट पर कई मोबाइल फोन और सिस्टम से जुड़ने की अनुमति देता है। आम शब्दों में यह एक स्क्रीन शेयरिंग प्लेटफॉर्म की तरह है। अपराधी इसका उपयोग धोखा देने और ऑनलाइन ठगी के लिए कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि साइबर थाना में ऐसी शिकायत आई है कि एक साइबर अपराधी ने एक युवक के मोबाइल फोन में एनीडेस्क एप डाउनलोड करवा 99,400 रुपये की ठगी की है।
ऐसे करते है ठगी
कुछ व्यक्ति सर्च इंजन पर मौजूद कस्टमर केयर सेंटर का नंबर सर्च करके इस्तेमाल करते हैं और कुछ मामलों में पीड़ित खुद कुछ समस्याओं के समाधान के लिए कस्टमर केयर को कॉल करते हैं। ऐसे में ठग का मकसद पीड़ित के मोबाइल फोन पर एनीडेस्क या टीम व्यूअर एप डाउनलोड करने के लिए बाध्य करना होता है।
कोई भी एप डाउनलोड करने के बाद धोखाखड़ी करने वाले को नौ अंकों के रिमोट डेस्क कोड की जरूरत होती है। इसलिए वह उसके लिए पीड़ित से पूछताछ करेगा। जब पीड़ित एक बार नौ अंकों वाला कोड बता देता है और एप संचालन की अनुमति दे देता है तो ठगों को अपने डिवाइस पर पीड़ित के डिवाइस की स्क्रीन दिखने लगेगी और वह इसे रिकॉर्ड भी कर सकता है। जब वह अपने बैंकिंग या यूपीआई एप की आईडी या पासवर्ड टाइप करता है तो ठग उसे नोट कर लेता है। फोन के लॉक होने पर भी यह एप बैकग्राउंड में काम करता है। एनीडेस्क एप एंड्रायड फोन पर दूसरे व्यक्ति को उसकी जानकारी के बिना पीड़ित के फोन की स्क्रीन देखने और रिकॉर्ड करने की अनुमति देता है। साइबर अपराध संबंधी शिकायत दर्ज कराने के लिए पीड़ित व्यक्ति हेल्पलाइन नंबर 1930 और साइबर क्राइम पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट कर नजदीकी थाने में भी सूचना दें।