जम्मू में आतंकी बुरहान के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद वहां फैली हिंसा के माहौल से खुद को बचाते हुए शहर के सात परिवार सकुशल लौट आए हैं। इन सात परिवारों में 20 सदस्य शामिल हैं। उनके सकुशल लौटने से परिवार के लोगों ने राहत की सांस ली है।
कुंजलाल गार्डन निवासी संजय गाबा ने बताया कि वे मंगलवार शाम तीन गाड़ियों में अमरनाथ यात्रा के लिए गए थे। वे शुक्रवार को दर्शन करके श्रीनगर के अनंतनाग पहुंचे थे। हिंसा कर रहे उपद्रवियों ने उनकी दो गाड़ियों पर पथराव शुरू कर दिया।
दो कार क्षतिग्रस्त कर दी गईं। वे फिर ढाई घंटे में जैसे-तैसे 15 किलोमीटर की दूरी तय कर सेना के एक कैंप तक पहुंचे। रास्ते में कोई सैनिक नहीं मिला और उपद्रवियों का तांडव था। कैंप में सैनिकों ने रात दो बजे घोषणा करते हुए कहा कि उपद्रवी कभी भी यहां पहुंच सकते हैं। फिर फंसे लोगों को वहां से रवाना कर दिया गया। सफर में कई ऐसे दौर आए, जब उन्हें जान आफत में फंसी नजर आई। वे किसी तरह यहां पहुंच पाए। लौटे परिवारों से मिलने के लिए मोहल्ले के लोग उमड़ रहे हैं।
अमर नाथ यात्रा से लौटे हिसार निवासी संजय ने बताया कि आते समय अनंतनाग के पेट्रोल पंप से आधा किलोमीटर आगे चलते ही काफी संख्या में लोग दिखाई दिये। हम तीन गाड़ियों में सवार थे। जैसे-जैसे आगे बढ़े तो उपद्रवी हमारी गाड़ियों के नजदीक आ गए।
वो तकरीबन 25 टुकड़ियों में थे। एक-एक टुकड़ी में दो सौ के करीब लोग थे। उन सभी ने कारों को रोककर शीशे तोड़ दिये। डंडे, ईंटों और पत्थरों से हमला कर दिया। उन्होंने तीनों गाड़ियों के ड्राइवरों से मारपीट भी की। साथ ही हमें जान से मारने की धमकी देते रहे। ये उपद्रवी अनंतनाग के रास्ते पर तकरीबन 15 किलोमीटर तक खड़े थे।
जान बची तो लाखों पाए
संजय ने बताया कि जैसे तैसे वहां से निकले तो थोड़ी दूरी पर फौजियों का एक कैंप दिखाई दिया। जिसके पास जाने पर वहां कोई नहीं मिला। हालांकि वहां बहुत से यात्रियों की गाड़िया खड़ी थी। कुछ समय बाद फौजियों की एक गाड़ी आई जो हमें यह बोलकर चली गई कि अपनी गाड़ियों में ही रहना।
इसके बाद वो वहां से चले गए। कुछ समय बाद फौजियों की गाड़ी दोबारा आई और उन्होंने कहा कि यहां से जितना जल्दी हो सके जाने की तैयारी कर लो, तुम्हें यहां किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिल सकती। अगर यहां रूके तो मारे जाओगे।