अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान में शामिल महिलाएं।
हिसार। आधुनिक दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, चाहे वह घर हो या कार्यस्थल, लेकिन इन सबके बीच उन्हें मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना भी करना पड़ रहा है।
पारिवारिक जिम्मेदारियां, सामाजिक अपेक्षाएं और कार्यस्थल की चुनौतियां के बीच महिलाएं खुद को भूल जाती हैं। सबकी परेशानियों को खुद ओढ़कर अपनी बात किसी को नहीं बता पाती। नतीजतन तनाव और डिप्रेशन में चली जाती हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत रविवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित तनाव प्रबंधन कार्यशाला में नारी नारायणी फाउंडेशन की महिलाओं ने इस विषय पर गंभीर मंथन किया। महिलाओं ने इस बात पर भी बल दिया कि तनाव से निपटने के लिए परिवार का सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
एक महिला तभी स्वस्थ और सशक्त रह सकती है, जब उसे अपने परिवार से समर्थन और सहयोग प्राप्त हो। महिलाओं को अपने शौक पूरे करने के लिए हर दिन में कम से कम 20 मिनट अपने लिए जरूर निकालने चाहिए ताकि वे तनावमुक्त हो सकें। महिलाओं को मानसिक तनाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। कार्यशाला में कमला सैनी, मंजू व आरती सहित संगठन से जुड़ीं सभी महिलाओं ने तनाव प्रबंधन पर विचार साझा किए।