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हरसैक ने ढूंढी 34 फायर लोकेशन, पांच किसानों के खिलाफ एफआईआर के लिए लिखा

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खेत में पड़े फसल के अवशेषों पर छोड़ा गया पानी। - फोटो : Hisar
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सरकार और जिला प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद किसान फसल के अवशेष जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। एचएयू स्थित हरसैक सैटेलाइट के जरिये विभाग और प्रशासन को आग की लोकेशन मुहैया कर रहा है। अभी तक जिले में हरसैक द्वारा 34 फायर लोकेशन दी गई। हालांकि यह कहना भी गलत होगा कि सभी किसान फसल अवशेष जला रहे हैं, क्योंकि बहुत से किसान अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण को लेकर अब जागरूक हो गए हैं।
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हरसैक द्वारा मुहैया कराई गई 34 फायर लोकेशन में से चार लोकेशन ढंढूर डंपिग स्टेशन में लगी आग की पाई गई। बाकी में कई किसानों को नोटिस जारी किए गए तो पांच किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है। दूसरी ओर डीसी द्वारा बिना एसएमएस (सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम) वाली कंबाइन से फसल कटाई करने पर रोक लगा दी गई है। इस संबंध में बुधवार को डीसी की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें पराली जलाने बारे प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की गई। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना एसएमएस वाली कंबाइन से कटाई करने पर रोक लगाने संबंधी आवश्यक कदम उठाए जाएं। इसी संबंध में कृषि उपनिदेशक ने भी अपने विभागीय अधिकारियों को इस तरह बिना एसएमएस वाली कंबाइन से कटाई रोकने में सहयोग के निर्देश दिए हैं। पत्र में उन्होंने उपमंडल कृषि अधिकारी हिसार, हांसी, सहायक कृषि अभियंता हिसार, सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी हिसार, सहायक सांख्यिकी अधिकारी हिसार और सहायक पौधा संरक्षक अधिकारी हिसार को लिखे पत्र में बिना एसएमएस वाली कंबाइन से कटाई की सूचना तुरंत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरओ या एसडीओ को देने के निर्देश दिए हैं।
क्या है एसएमएस वाली कंबाइन
सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) वाली कंबाइन से कटाई का यह फायदा होता है कि उससे फसल के अवशेष इकट्ठा होते रहते हैं, जिन्हें बाद में एक जगह डालकर प्रयोग किया जा सकता है। इसके विपरीत बिना एसएमएस वाली कंबाइन से कटाई के दौरान अवशेष को मशीन बाहर खेत में ही फेंकती चलती है। इस कारण किसान उन्हें इकट्ठा करने की बजाय बाद में आग लगा देते हैं। इसी के चलते बिना एसएमएस वाली कंबाइन से कटाई पर रोक लगाई गई है।
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पूरे गांव में नहीं जलाते पराली
बीड़ बबरान गांव के सरपंच मनविंदर सिंह ने कहा कि कुछ साल पहले तक गांव में पराली जलाई जाती थी, लेकिन कई साल से अब कोई भी किसान फसल के अवशेष नहीं जलाता। किसान अपने खेत में ट्रैक्टर-हेरो से खेत की जुताई कर देते हैं। अवशेष उससे कट कर मिट्टी में दब जाते हैं और उसके बाद खेत में पानी लगा दिया जाता है। 2-3 दिन में ही वह फसल के अवशेष पूरी तरह मिट्टी में मिलकर खाद का काम करते हैं। किसान अब जागरूक हो चुके हैं और गांव में कोई भी अवशेष नहीं जलाता। उन्होंने कहा कि अवशेष जलाने से जमीन की उर्वरकता नष्ट होती है।
धान की फसल की कटाई के बाद पहले तो कटर से खेत में खड़े फानों को काटा जाता है। उसके बाद रोटावेटर से जमीन की जुताई की जाती है, जिसके बाद पराली जमीन में मिट्टी में मिल जाती है और कुछ समय बाद नष्ट हो जाती है।
- राजा लाठर, बास खुर्द
हैप्पी सीडर नामक मशीन से धान फानों में से ही गेहूं की बिजाई की जा सकती है। मशीन एक तो धान के फानों की कटाई कर देती है और साथ ही गेहूं की फसल की बिजाई कर देती है। उसके कुछ समय बाद धान के फाने गलकर नष्ट हो जाते हैं।
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शमशेर लोहान, नारनौंद
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