हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) ने स्टार एग्री सीड्स प्राइवेट लिमिटेड संगरिया हनुमानगढ़ (राजस्थान) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत एचएयू की तरफ से विकसित ज्वार, बाजरा, हरियाणा काबुली चना व मसूर की दाल को बढ़ावा दिया जाएगा।
कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि वैज्ञानिकों की ओर से किया गया शोध किसानों तक पहुंचाना विश्वविद्यालय की पहली प्राथमिकता है। अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर ने बताया कि एचएचबी- 299 एक बायोफोर्टिफाइड किस्म है। इस किस्म में अन्य से तुलना में अधिक पैदावार मिलती है और यह रोगरोधी भी है।
यह बाजरा की अधिक लौहयुक्त (73 पीपीएम) संकर किस्म है। इसके सिरटे मध्यम व लंबे होते हैं। उपरोक्त किस्म 75-81 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। यह किस्म हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। अच्छे रखरखाव करने पर यह किस्म 49.0 क्विंटल/हेक्टेयर तक पैदावार देने कि क्षमता रखती हैं।
चारा ज्वार सीएसवी 53 एफ देश के सभी चारा ज्वार उत्पादक क्षेत्रों में उपरोक्त फसल की बिजाई की जाती है। एकल कटाई वाली इस ज्वार के सूखे चारे की उपज 152.67 क्विंटल/हेक्टेयर, हरा चारा उपज 482.81 क्विंटल/ हेक्टेयर तथा बीज उपज 13.39 क्विंटल/हेक्टेयर है।
चारा ज्वार सीएसवी 64 एफ ज्वार सीएसवी 64 एफ (एकल कटाई) की हरे चारे की उपज 466.3 क्विंटल/हेक्टेयर, सूखे चारे की उपज 121.8 क्विंटल/ हेक्टेयर तथा बीज उपज 15.2 क्विंटल/हेक्टेयर है। यह किस्म उत्तर भारत के सभी चारा ज्वार क्षेत्रों के लिए अनुमोदित है।
हरियाणा काबुली चना एचके 5 एक उच्च उपज देने वाली और जल्दी पकने वाली किस्म है। यह किस्म उखेड़ा रोग के प्रति सहनशील है। हरियाणा में बिजाई के लिए उपयुक्त किस्म है। इसकी औसत पैदावार 24.55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और यह 151 दिन में पकने वाली किस्म है। मसर एलएच 17-19 इस फसल की औसत उपज 15-16 क्विंटल/हेक्टेयर। इसकी मध्यम परिपक्वता की अवधि 130 से 135 दिन है। रतुआ रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली यह फसल उखेड़ा रोग प्रतिरोधक क्षमता मध्यम है।