कागजों में ओडीएफ जिला घोषित करने के दूसरे ही दिन सांसदों द्वारा प्रशासन की खोली गई पोल के बाद निगम अधिकारी हरकत में आ गए। सुुशासन सहयोगी मनीषा भाटोटिया के साथ एक्सईएन रामजीलाल ने पूरे शहर के कम्युनिटी, पब्लिक व सुलभ टॉयलेट चेक किए। सुलभ को छोड़कर बाकी की हालात बदतर थी। एक्सईएन रामजीलाल ने टॉयलेट की साफ सफाई को लेकर अधिकारी ने मौके पर ही निर्देश दिए।
कई टॉयलेट के लगे मिले ताले
नगर निगम के अधिकारी व सुशासन सहयोगी ने जब टॉयलेट्स की स्थिति जांची तो रेलवे रोड, आजाद नगर सहित कई टॉयलेट ऐसे मिले जिन पर ताले लटके हुए थे। लोगों ने शिकायत भी की कि अगर ताले ही लगाकर रखने थे तो इन्हें बनाया ही क्यों। इस पर अधिकारी कोई जवाब नहीं दे पाए। कई टॉयलेट की हालात बेहद खराब थी। सफाई कर्मचारियों को निर्देश दिया गया कि उन्हें साफ करवाएं। जिन पर ताले लगे थे उनको खोलने के निर्देश दिए गए। किसी में पानी का कनेक्शन नहीं था तो किसी में आउटर लाइन नहीं डाली गई थी।
अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
सांसदों द्वारा मीटिंग में अधिकारियों के समक्ष सवाल उठाए जाने के मामले के बाद अमर उजाला ने शहर के टॉयलेट की स्थिति बताई थी। शहर में करीब 23 नए टॉयलेट बने हैं जो जनता के लिए नहीं खोले गए हैं। अधिकारियों के समक्ष आम लोगों की शिकायत के बाद भी टॉयलेट्स पर ताले लगे हुए थे।
कैसे किया जनता को जागरूक
ओडीएफ को लेकर जागरूकता संदेश कहां कहां लगे हैं अधिकारियों ने इनका भी सुशासन सहयोगी को निरीक्षण करवाया। हालांकि निगम ने जागरूकता को लेकर कोई अधिक प्रयास नहीं किए। स्वच्छता सर्वेक्षण टीम ने जब शहर का सर्वे किया तब जाकर निगम अधिकारियों ने कुछ जागरूकता को लेकर शहर में होर्डिंग्स लगवाए थे।
हमने शहर के कम्युनिटी, पब्लिक व सुलभ शौचालय चेक किए हैं। जहां साफ सफाई नहीं वहां करवाने के निर्देश दिए गए हैं। जिन एरिया में टॉयलेट पर ताले थे उन्हें जनता के लिए खुलवाया गया है।
- रामजीलाल, एक्सईएन नगर निगम