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अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के आवेदकों से अब मांगी जा रही फ्लैट की पूरी राशि

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अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के आवेदकों को आ रही परेशानी को बताते पार्षद प्रीतम सैनी। साथ हैं पार्ष? - फोटो : Hisar
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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी में हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट लेने के इच्छुक आवेदकों की परेशानी बढ़ गई है। पहले जहां आवेदकों को सब्सिडी देने का वादा किया गया था, वहीं अब फ्लैट की पूरी कीमत जमा करवाने के लिए आवेदकों को नोटिस भेजे गए हैं।
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दरअसल, अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी यानी एएचपी के आवेदकों को 6 लाख 32 हजार रुपये में हाउसिंग बोर्ड के वन रूम सेट के फ्लैट मिलने थे। इसके लिए आवेदकों से 57 हजार रुपये जमा करवाए गए थे। बाकी पैसा आवेदकों को आसान किस्तों में जमा करवाना था। मगर अब उनके पास एक साथ सारी राशि जमा करवाने के नोटिस पहुंचे हैं।
650 आवेदकों को मिली थी स्वीकृति
योजना के तहत 7 हजार 771 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें से 650 आवेदकों को स्वीकृति मिली थी। इनमें से पहले चरण में 250 लोगों को फ्लैट दिए जाने थे। फ्लैट लेने वालों को स्थानीय निकाय विभाग द्वारा ढाई लाख रुपये की सब्सिडी दी जानी है। नगर निगम प्रशासन द्वारा सर्वे करके इनकी सूची हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों को सौंपी गई थी। विशेष बात यह है कि योजना के प्रचार-प्रसार के लिए बड़े-बड़े दावे किए गए थे। यहां तक की निगम कार्यालय में ही कैंप लगाया गया। अब आवेदक निगम कार्यालय में ही चक्कर लगा रहे हैं।
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दो रुपये सैकड़े के हिसाब से ब्याज पर लिए थे पैसे
जयदेव नगर निवासी राजकुमार ने बताया कि उन्होंने एएचपी योजना के लिए आवेदन किया था। उस समय 57 हजार रुपये जमा करवाए गए थे। बाकी फ्लैट की पूरी राशि के लिए किस्त बनाने का कहा गया था। मगर अब नोटिस आया है कि पूरा पैसा एक साथ जमा करवाओ। राजकुमार ने बताया कि उनके पास इतना सामर्थ्य नहीं है कि वह 6 लाख 32 हजार रुपये एक साथ जमा करवा दें। 57 हजार रुपये भी दो रुपये प्रति सैकड़े के हिसाब से ब्याज पर लिए थे। अब फ्लैट लेना दूभर हो गया है।
हमारा काम सर्वे करके लिस्ट सौंपने का था। फ्लैट मुहैया करवाने की जिम्मेदारी हाउसिंग बोर्ड की है। हाउसिंग बोर्ड के अधिकारी ही इसका कोई जवाब दे सकते हैं।
- हरदीप सिंह, ईओ, नगर निगम
ढाई लाख रुपये की सब्सिडी नहीं आई है। इसलिए आवेदकों से पूरे पैसे जमा करवाने के लिए कहा गया है। यह आदेश भी हमारे मुख्यालय से आए हैं। स्थानीय स्तर पर हमारे हाथ में कुछ नहीं है। मुख्यालय स्तर पर इसके लिए पत्राचार भी चल रहा है।
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- राजबीर बैनीवाल, एस्टेट मैनेजर, हाउसिंग बोर्ड
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