आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानी पूर्व सरपंच चौ. सूरजभान श्योराण का शुक्रवार को गांव चिड़ोद में निधन हो गया। चौ. सूरजभान श्योराण ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना अहम योगदान दिया था तथा वे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के साथ आजाद हिन्द फौज में रहे थे। सूरजभान श्योराण के बड़े भाई चौ. जयलाल श्योराण भी आजाद हिन्द फौज में ही थे, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आजादी की लड़ाई में शहादत पाई थी। रिटायरमेंट के बाद गांव की पहली पंचायत बनने पर चौ. सूरजभान श्योराण को गांव चिड़ोद का सरपंच भी चुना गया था और बाद में उन्हें नंबरदार की पदवी भी दी गई।
स्वतंत्रता सेनानी चौ. सूरजभान का जन्म 25 फरवरी 1922 को गांव चिड़ोद के किसान चौ. गणपत राम श्योराण के घर में हुआ। इनके पिता गांव चिड़ोद के नंबरदार थे। 19 साल की उम्र में सन 1941 में वो आईएनए में भर्ती हो गए। उसके बाद जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब आजाद हिंद फौज बनाई तब उसमें शामिल हो गए। चौ. सूरजभान श्योराण में देश की सेवा का जज्बा देखकर नेताजी ने उन्हें नंबर एक बटालियन में शामिल कर लिया। उसके बाद उनको कोहिमा में लड़ाई के लिए भेजा गया।
इस लड़ाई में पहले ही दिन उनके 7-8 साथी मारे गए और कुछ साथी हवाई हमले में भी मारे गए। उसके बाद जापान ने भी हथियार डाल दिए थे। उसके बाद उनको रंगून की जेल में डाल दिया गया। जब वो आजादी मिलने के बाद जेल से बाहर आए तो समुद्री मार्ग से दो जहाजों में उनको व अन्य साथियों को भारत लाया गया, जिसमें उनके बड़े भाई चौ. जयलाल श्योराण भी शामिल थे। बताया जाता है कि जब वो जहाज भारत की ओर आ रहे थे तो रास्ते में एक जहाज समुद्र में डूब गया था। उस जहाज में उनके बड़े भाई चौ. जयलाल श्योराण भी सवार थे। उनकी उस हादसे में मौत हो गई थी और परिजनों को उनकी लाश भी नहीं मिल पाई थी।
सूरजभान श्योराण अपने पीछे पांच पुत्र, 17 पौत्र व पौत्रियां तथा एक परपौत्री सहित भरा पूरा परिवार छोड़कर गए हैं। स्वतंत्रता सेनानी चौ. सूरजभान श्योराण को प्रशासन की ओर से श्रद्धांजलि देने तहसीलदार तथा सदर इंस्पेक्टर व अनेक कर्मचारी पहुंचे। पुलिस की एक टुकड़ी ने उन्हें सलामी दी।
उनकी अंतिम यात्रा में पूर्व जिला पार्षद सूबे सिंह आर्य, ईश्वर सिंह नंबरदार मुकलान सहित आसपास के गांव व चिड़ोद के ग्रामीणों ने भारी संख्या में भाग लिया। इस अवसर पर पूर्व जिला पार्षद सूबे सिंह आर्य ने दु:ख व्यक्त किया कि जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण तक न्योछावर करने में कदम पीछे नहीं हटाए उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए विपक्ष या सत्तारूढ़ पार्टी का कोई विधायक व नेता उपस्थित नहीं हुआ।