हिसार। शहर को व्यवस्थित करने के लिए मिल गेट रोड पर बनी नई सब्जी मंडी में सफाई व्यवस्था बदतर हो चुकी है। शहर से दूर होने के कारण यहां पहले ही आम ग्राहकों का पहुंचना मुश्किल था और अब फैली गंदगी के कारण लोगों ने यहां आने से पूरी तरह परहेज कर लिया है।लाखों-करोड़ों रुपये के फल-सब्जी कारोबार वाली इस मंडी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।
मंडी प्रशासन ने यहा स्थायी कर्मचारियों के बजाय सफाई का काम ठेके पर दे रखा है। ठेकेदार के पास न तो पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही जरूरी संसाधन। स्थिति यह है कि यदि कभी झाड़ू लग भी जाए तो कूड़े का उठान महीनों नहीं होता। मंडी में बने तीनों शेड के चारों तरफ कचरे के पहाड़ खड़े हैं जिससे यह सब्जी मंडी कम और कूड़े की मंडी ज्यादा नजर आती है।
बारिश ने बढ़ाई आढ़तियों और मासाखोरों की मुश्किल
मंडी में करीब 30 आढ़ती और 40 से अधिक मासाखोर (छोटे विक्रेता) अपना कारोबार करते हैं। वर्तमान में जगह-जगह बारिश का पानी जमा होने और सड़ते कचरे की बदबू के कारण नरकीय हालात बन चुके हैं। कीचड़ और जलभराव के चलते ग्राहकों का मासाखोरों की फड़ तक पहुंचना भी दूभर हो गया है, जिसका सीधा असर उनके व्यापार पर पड़ रहा है। बुनियादी सुविधाओं के नाम पर मंडी में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था भी ना के बराबर है।
गंदगी के बीच बैठने को मजबूर
मंडी में चारों तरफ गंदगी और कूड़े के ढेर लगे हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और दयनीय हो जाती है। मासाखोरों को इसी सड़ांध के बीच बैठकर धंधा करना पड़ रहा है। मार्केट कमेटी के अधिकारी अक्सर यहां आते हैं सब कुछ अपनी आंखों से देखते हैं लेकिन मूकदर्शक बनकर चले जाते हैं। - अजीत कुमार, मासाखोर, नई सब्जी मंडी हिसार।
ग्राहक घटे, लगातार शिकायतें भी बेअसर
सफाई और खराब लाइट व्यवस्था के लिए हमने कई बार अधिकारियों से लिखित शिकायत की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्वच्छता के अभाव में मंडी में ग्राहकों की संख्या लगातार घट रही है जिसका सबसे बड़ा खामियाजा छोटे मासाखोरों को भुगतना पड़ रहा है। - मुकेश कुमार, प्रधान, मासाखोर एसोसिएशन, नई सब्जी मंडी हिसार।