हिसार (प्रवीन) 9 दिसंबर मुस्लिम कल्याण कमेटी हरियाणा का संघर्ष अब रंग लाने लगा है। कमेटी की ओर से जनहित याचिकाओं, धरना प्रदर्शन, आरटीआई आदि के माध्यम से मुस्लिम समाज के लिए ऐसे कई महत्वपूर्ण फैसले संवैधानिक तौर पर लागू कराए गए है, जिससे खुद वक्फ बोर्ड अपनी जमीन को लीज पर देने में अपनी मनमानी नहीं कर सकेगा। वहीं अगर कोई अन्य व्यक्ति भी अगर वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्जा करता है तो उस पर भी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। मुस्लिम कल्याण कमेटी हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष हरफूल खान भट्टी ने बताया कि कमेटी की ओर से लंबे संघर्ष के बाद भारत सरकार द्वारा वक्फ एमेंडमेंट एक्ट 2013 की अधिसूचना जारी करते हुए कब्रिस्तान, खानका व ईदगाह की संपत्तियों को लीज (पट्टा)पर देने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके अतिरिक्त अगर वक्फ बोर्ड की कोई अन्य संपत्ति है तो उसे लीज पर देने से पहले राष्ट्रीय स्तर के किसी समाचार पत्र में विज्ञप्ति देनी होगी और उसके बाद बोली के आधार पर ही लीज पर दी जा सकेगी। इससे पहले वक्फ बोर्ड के अधिकारी गुपचुप तरीके से अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए लीज पर दे देते थे, जिसका राजस्व वक्फ बोर्ड के पास न जाकर संबंधित अधिकारियों की जेब में जा रहा था। उन्होंने कहा कि नए संशोधित कानून में वक्फ बोर्ड की जमीन पर कोई कब्जा नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा कोई करता है तो उसे गैर जमानती अपराध माना जाएगा। जिसके तहत दो वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि पहले वक्फ बोर्ड की जमीन हस्तांतरित करने के लिए बोर्ड के एक तिहाई सदस्यों की मजूंरी अनिवार्य थी, लेकिन अब नए कानून के तहत कुल सदस्यों का दो तिहाई बहुमत होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा हरियाणा या केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड की जमीन को बिना वक्फ बोर्ड की सहमति के बिना अधिग्रहण नहीं कर सकेगी। इसी तरह वक्फ बोर्ड की कृषि योग्य भूमि तीन वर्ष से ज्यादा लीज पर नहीं दी जा सकेगी। इसके अलावा वक्फ बोर्ड की जमीनों पर कब्जे को हटवाने के लिए संबंधित उपमंडल अधिकारी व जिला उपायुक्त की जिम्मेदारी तय की गई है। वहीं वक्फ बोर्ड की दुकान, रिहायशी मकान आदि को अब मार्केट रेट पर ही पट्टा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नए संशोधित कानून में ऐसे कई प्रावधान कराए गए हैं, जो वक्फ बोर्ड की आमदनी को बढ़ाएगा, साथ ही संपत्तियों के रख रखाए व अवैध कब्जों जैसी समस्याओं से भी छुटकारा मिलेगा।