अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। फरवरी 2016 में हांसी के पास गांव सिसाय और सैनीपुरा के बीच पेड़ काटने, सरकारी गाड़ी को तोड़ने, आगजनी व उपद्रव करने के चार दोषियों को कोर्ट ने पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। इसके अलावा मामले में प्रति दोषी पर 63800 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं भरने पर एक साल की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। शुक्रवार को इस केस पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकुमार जैन की कोर्ट ने फैसला सुनाया।
केस में गांव सिसाय कालीरामण के 21 वर्षीय राजू, 28 वर्षीय सूरज, 30 वर्षीय दलजीत उर्फ जीता व गांव सिसाय बोलान के 30 वर्षीय विनोद को दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया गया। दोषियों की आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 341, 332, 353, 186, 188, 435, 436 व 120 बी के तहत सजा सुनाई गई है। केस में कुल 14 गवाह थे, जो सभी पुलिसकर्मी हैं। चारों आरोपियों को 23 सितंबर को दोषी करार दिया गया था।
न्यायाधीश ने पुलिस की गवाही को माना अहम
केस में सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजकुमार जैन ने इस केस में पुलिसकर्मियों की गवाही को अहम माना है। केस में कुल 14 पुलिसकर्मी गवाह थे। कोर्ट ने अपने फैसले में पुलिस के आरोपों को सही मानते हुए दोषी करार दिया है। पुलिस ने साक्ष्यों के तौर पर आरोपियों की फोटो कोर्ट को सौंपी थी। इसके अलावा दोषियों की मोबाइल लोकेशन को भी सुबूत के तौर पर दिया गया था। केस में करीबन 200 लोगों पर आरोप था, जिनमें से पुलिस चार की पहचान कर पाई।
यह था मामला
सदर थाना पुलिस को शिकायत देकर इंस्पेक्टर विद्यानंद ने बताया कि 21 फरवरी 2016 को जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उन्हें सूचना मिली कि 200 के करीब उपद्रवी सिसाय की ओर से सैनीपुरा की तरफ जा रहे हैं। ये लोग हाथों में लाठी, डंडे व अन्य हथियार लिए हुए थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने इन सभी को सिसाय पुल के ऊपर रोक कर समझाने का प्रयास करते हुए वहां से जाने के लिए कहा, लेकिन ये लोग वहां से जाने की बजाय खेतों के रास्ते से सैनीपुरा की तरफ जाने लगे। जब पुलिस टीम ने उनको रोकने का प्रयास किया तो इन लोगों ने सड़क किनारे खड़े सफेदे के पेड़ काटकर सड़क पर डाल दिए, जिससे पुलिस टीम की गाड़ी वहां पर फंस गई। इसकेे बाद हमलावरों ने सैनीपुरा गांव की ढाणियों में पहुंचकर वहां पर तोड़फोड़ की व घरों में आग लगाने का प्रयास किया। उपद्रव बढ़ता देखकर पुलिस टीम ने वहां पर आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद तनाव और बढ़ गया और उपद्रवियों ने पुलिस की गाड़ी को तोड़ दिया। दोनों पक्षों के ग्रामीणों में काफी देर तक पथराव हुआ, जिसमें कई लोग जख्मी भी हुए। पुलिस से स्थिति नहीं संभलने पर वहां पर आर्मी की टुकड़ी को भेजा गया। इस मामले में करीबन 200 उपद्रवियों के खिलाफ दंगा फैलाने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी करने, रास्ता रोककर सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने व भारतीय वन अधिनियम व धारा 144 के उल्लंघन का केस दर्ज हुआ था।
डीएसपी ने की जांच, सरपंच ने की पहचान
मामला शांत होने के बाद पुलिस ने केस दर्ज करके जांच शुरू की। मामले की जांच डीएसपी जितेंद्र सिंह को सौंपी गई। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों से वारदात करने वालों के बारे में जानकारी ली। इसके अलावा मामले की वीडियो रिकॉर्डिंग व सीसीटीवी के आधार पर आरोपियों को पहचाना गया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से भी आरोपियों की पहचान करवाई गई। सिसाय गांव के सरपंच द्वारा आरोपियों को कन्फर्म किया गया। कोर्ट में भी 14 पुलिसकर्मियों ने गवाही दी।