अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। नौंवी एशियन बोफेलो कांग्रेस में आयोजित कैटवाक में रैंप पर 25 लाख तक की भैंस और 25 करोड़ तक के झोटे ने अपनी चमक-दमक से देश-विदेश के साइंटिस्टों और पशु पालकों को हैरत में डाल दिया।
केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र में पानीपत के डींडवाड़ी निवासी नरेंद्र सिंह का झोटा शहंशाह जब रैंप पर आया तो उसके डील-डोल को देखकर सभी मुग्ध हो गए। इस मौके पर कुरुक्षेत्र के सुनारिया गांव के पशुपालक कर्मबीर की भैंस पार्वती प्रथम रही। उसने प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा 25.380 किलोग्राम दूध दिया। कर्मबीर के अनुसार इस भैंस की कीमत 25 लाख रुपये तक लग चुकी है।
विदेशी साइंटिस्ट ने मांगा मुर्राह का जर्म प्लाज्मा
नौंवी एशियन बोफेलो कांग्रेस में पहुंचे 15 देशों के वेटरनरी साइंटिस्टों ने रविवार को हरियाणा की मुर्राह नस्ल का जर्म प्लाज्मा और 100 भैंसों की मांग की। ब्राजील के साइंटिस्ट विलियम वाले ने यह मांग रखी है। विदेशी साइंटिस्ट हरियाणा की मुर्राह और झोटों को देखकर इतने प्रभावित होने के बाद यह मांग रखी।
केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र में चार दिवसीय बोफेेलो कांग्रेस का रविवार को अंतिम दिन था। इस कांग्रेस में अमेरिका, कोलंबिया, ग्वालमाटा, ब्राजील, बुल्गारिया, नेपाल, श्रीलंका, फिलिपन, बांग्लादेश, इटली, पेरागुआ सहित करीब 15 देशों के वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। कांफ्रेंस के अंतिम दिन देशभर के मुर्राह नस्ल के बढ़िया नस्ल के झोटे और भैंस यहां लाई गईं। बाहरी वैज्ञानिकों के सामने ही दूध प्रतियोगिता का आयोजन कराया गया। इसमें तीन अलग-अलग समय दूध निकालकर दिखाया। प्रतियोगिता में 25 किलोग्राम से अधिक दूध देने वाली भैंस विजेता रही।
रविवार को हरियाणा और पंजाब के पिछले तीन साल की टॉप थ्री भैंस और झोटे यहां बुलाए गए थे। सम्मेलन में करीब 42 भैंस और 40 झोटे लाए गए थे। इसमें करोड़ों की कीमत के झोटों को रैंप पर चलाकर कैटवाक कराया गया।
लाखों की भैंस, करोड़ों के झोटे
रैंप पर उतारी गई भैंसों की कीमत दो लाख से 25 लाख तक आंकी गई थी। झोटों की कीमत एक करोड़ से लेकर 25 करोड़ तक होने का दावा किया गया।
दूध प्रतियोगिता के विजेता...
1. सुनारिया (कुरुक्षेत्र) निवासी कर्मबीर की भैंस ने 25.380 किलोग्राम दूध दिया।
2. पंजाब के फिरोजपुर जिला निवासी वेदपाल की भैंस ने 25.205 किलोग्राम
3. हिसार के धान्सू निवासी रमेश की भैंस ने 24.615 किलोग्राम दूध दिया
एशियन कांग्रेस में 15 देशों के साइंटिस्ट ने हिस्सा लिया। मुर्राह नस्ल की भैंसों को देखकर विदेशी साइंटिस्ट काफी प्रभावित हुए। कुछ देशों ने भारत से मुर्राह नस्ल की भैंस और जर्म प्लाज्मा की डिमांड की। इसमें ब्राजील के साइंटिस्ट मुख्य हैं।
-डॉ. इंद्रजीत, निदेेशक, केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र
जो पदक लाएगा, उसे गिफ्ट में देंगे भैंस : धनखड़
समारोह में पहुंचे कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने कहा कि भैंस के दूध के कारण ही हरियाणा के पहलवान भी ताकतवर हैं। ये पहलवान देश के लिए कॉमनवेल्थ से लेकर ओलंपिक तक में सोना जीत रहे हैं। विजेता पहलवानों को सरकार की ओर से दूध के लिए भैंस गिफ्ट देंगे।