अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। स्वामी रामदेव के केस में ट्रांसफर एप्लीकेशन पर जवाब फाइल करने के लिए मंगलवार को स्वामी रामदेव की तरफ से उनके वकील लाल बहादुर खोवाल अदालत में पेश हुए और जवाब फाइल किया। सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार सिंगल की अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 29 मार्च 2019 निर्धारित की है।
उल्लेखनीय है कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आरके जैन ने इस मामले में बहस सुनने के बाद फैसले के लिए 11 अप्रैल 2019 की तारीख तय की थी। इसी बीच शिकायतकर्ता एडवोकेट रजत कल्सन ने केस को सत्र न्यायाधीश अरुण कुमार सिंगल की कोर्ट में ट्रांसफर करने की दरखास्त दी। इसके साथ ही कल्सन ने कहा था कि वे धारा 153, 153ए, 153एए, 153बी में स्वामी रामदेव के खिलाफ कार्रवाई नहीं करवाना चाहते, लेकिन धारा 294, 354 आईपीसी व एससी एसटी-एक्ट की धाराओं में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। स्वामी रामदेव की तरफ से उनके वकील लाल बहादुर खोवाल ने उनका पक्ष रखते हुए बहस की थी कि इन धाराओं में केस डालने से पहले शिकायतकर्ता को धारा 196 सीआरपीसी के तहत सरकार से अनुमति लेनी होती है। यह अति आवश्यक है, जो इस केस में नहीं ली गई, इसलिए शिकायत को खारिज किया जाए।
यह था मामला
एडवोकेट रजत कल्सन ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद अदालत में इस्तगासा दायर किया था, जिसमें कहा था कि स्वामी रामदेव ने लखनऊ में एक जनसभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के बारे में बोलते हुए अनुसूचित जाति के लोगों पर टिप्पणी की थी। इसी मामले में अधिवक्ता लाल बहादुर खोवाल स्वामी रामदेव की तरफ से अदालत में पेश हुए और जवाब फाइल किया कि स्वामी रामदेव द्वारा दिया गया वह बयान राजनीतिक था। इसमें बाबा रामदेव की कोई दुर्भावना नहीं थी। अब मामले की अगली सुनवाई 29 मार्च 2019 को होगी।