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सांसद दुष्यंत ने गीता ग्रंथ की खरीद पर उठाए सवाल

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
हिंदुओं का धार्मिक ग्रंथ गीता कम रेट में भी मार्केट में उपलब्ध है, लेकिन सरकार ने आस्था के नाम पर लाखों रुपये अदा कर गीता ग्रंथ की प्रतियां खरीदीं। जाहिर है कि गीता ग्रंथ खरीद में न केवल भारी अनियमितताएं बरती गई, बल्कि जनता के खून-पसीने की कमाई पानी की तरह बहाई गई।
सांसद दुष्यंत ने यह आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की है। दुष्यंत ने कहा है कि मुख्यमंत्री को इस मामले में आगे आकर इसका न केवल जवाब देना चाहिए, बल्कि पूरी खरीद प्रक्रिया की जांच करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इसकी निष्पक्ष जांच नहीं करवाई तो गीता महोत्सव आयोजन की पूरी खरीद प्रक्रिया का मामला सीएजी के समक्ष रखेंगे।
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सांसद ने आरटीआई के माध्यम से गीता ग्रंथ खरीद का खुलासा करते हुए कहा है कि गीता ग्रंथ की 10 प्रतियां तीन लाख 79 हजार 500 रुपये में खरीदी गई। यानी एक गीता की कीमत 37 हजार 950 रुपये है। उन्होंने इतनी मंहगी गीता पुस्तक खरीदने पर सवाल किए हैं, जबकि बाजार में इससे काफी कम कीमत पर गीता की प्रतियां उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा है कि प्रगति मैदान में चल रहे अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में तो गीता प्रेस गोरखपुर वाले 40 पैसे में एक गीता उपलब्ध करवा रहे हैं, जबकि ऑनलाइन खरीदने पर गीता की प्रति 200 से 300 रुपये में उपलब्ध है। अन्य कई प्रकार की गीता की पुस्तकें काफी कम कीमत पर उपलब्ध हैं। प्रदेश सरकार से पूछा है कि ऐसा इस खरीदी गई गीता ग्रंथ की पुस्तक में क्या था, जिसके लिए इतनी कीमत अदा की गई। मनोहर लाल की सरकार ने जनता के पैसे का दुरुपयोग करते हुए भारी भरकम कीमत वाली गीता ग्रंथ खरीदी है।
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