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सेक्टर 1-4 में 60.49 करोड़ की इन्हांसमेंट के नोटिस रद्द,2316 प्लाट धारकों को राहत

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
सेक्टर-1-4 में छह साल पहले भेजे गए इन्हांसमेंट के नोटिस को कोर्ट ने रद्द कर दिया है। लोअर कोर्ट के इस फैसले से 2316 प्लॉट धारकों को 60.49 करोड़ रुपये की बड़ी राहत मिली है। कोर्ट फैसले के आधार पर सेक्टर 9-11 की इन्हांसमेंट की गलत कैलकुलेशन के मामले के बाद अब सेक्टर-1-4 की इन्हांसमेंट गलत साबित हुई है। नोटिस पुनीत लिंबा की अदालत ने रद्द कर दिए हैं।
सेक्टर-1-4 के लोगों को इस फैसले से करोड़ों रुपये की इन्हांसमेंट से मुक्ति मिली है। कोर्ट ने फैसला दिया है कि हुडा ने जो वर्ष 2011 में नोटिस भेजे हैं, वो गलत कैलकुलेट कर दिए। कोर्ट के इस फैसले से 2316 प्लॉट धारकों को बड़ी राहत मिली है।
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आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने कहा कि कोर्ट का फैसला उनके हक में आया है। अब उन्हें हुडा को 60 करोड़ 49 लाख रुपये नहीं देने पड़ेंगे। इससे सेक्टरवासियों को बड़ा फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि हुडा की ये फितरत रही है कि रेजिडेंट को किसी तरह से लूट लिया जाए। इन्होंने सेक्टर-9-11 में भी गलत कैलकुलेशन कर करोड़ों की इन्हांसमेंट डाल दी थी। बाद में जब सेक्टर वासियों ने विरोध प्रदर्शन किया तो कैलकुलेशन की जांच की गई। इसमें करोड़ों का अंतर निकला।
2011 में भेजे थे 1060 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से नोटिस
सेक्टर के प्रधान कर्नल चतर सिंह गोयत ने बताया कि हुडा की तरफ से उन्हें वर्ष 2011 में 1060 प्रति वर्ग गज के हिसाब से नोटिस भेजे थे। आरडब्ल्यूए ने इस नोटिस को वर्ष 2013 में लोअर कोर्ट में चैलेंज किया। उन्होंने आधार बनाया कि जो इन्हांसमेंट नोटिस भेजे गए हैं, वो गलत कैलकुलेशन के आधार पर भेजे गए हैं। चार साल बाद आखिर आरडब्ल्यूए की जीत हुई। कोर्ट ने इन्हें रद्द कर दिया।
आरडब्ल्यूए के वकील ने इन तीन प्वाइंट्स को बनाया आधार
एडवोकेट संजय गर्ग ने बताया कि हुडा ने जो नोटिस भेजे थे, वो गलत कैलकुलेशन के आधार पर भेजे गए थे। दूसरा आधार यह बनाया कि रिहायशी पर ही कॉमर्शियल एरिया का इन्हांसमेंट डाल दी थी, जबकि कॉमर्शियल पर अलग से इन्हांसमेंट जानी चाहिए थी। यानी सीधे रूप में पूरे सेक्टर का बोझ हुडा रेजिडेंट पर डाल दिया गया। तीसरा जो ब्याज लगाया गया, वह कानूनी रूप से 12 प्रतिशत से अधिक नहीं लगाया जा सकता। हुडा ने इस पर 15 प्रतिशत से भी अधिक लगा दिया।
227 एकड़ में बसा सेक्टर-1-4
सेक्टर-1-4 को कुल 227 एकड़ में बसाया गया है। इसमें 2316 रिहायशी प्लॉट काटे गए हैं। कई साल पहले इन प्लॉटों की पजेशन दी जा चुकी है। सेक्टर में करीब 30 प्रतिशत मकानों का ही निर्माण हुआ है।
ऑल सेक्टर आरडब्ल्यूए ने सराहा फैसला
ऑल सेक्टर आरडब्ल्यूए के संयोजक यशवीर मलिक ने कहा कि इन्हांसमेंट के खिलाफ पहले से ही हमारी जंग है। भारी भरकम रेट पर सेक्टर के प्लॉट खरीदे थे। उसके बाद हजारों रुपये प्रति गज की इन्हांसमेंट किसी सूरत में सहन नहीं की जा सकती।
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सेक्टर-15 को सुप्रीम कोर्ट से मिली थी राहत
सेक्टर-15 के निवासियों को करीब 35 साल बाद इन्हांसमेंट से राहत मिली थी। सेक्टर-15 आरडब्ल्यू की ओर से लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़ा गया। सुप्रीम कोर्ट ने हजारों रुपये प्रति गज की इन्हांसमेंट से राहत दी थी। अर्बन इस्टेट टू के निवासियों को भी पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के फैसले से राहत मिली थी।
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