अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
टाइपिंग टेस्ट का ढोंग करने वाले नगर निगम की पोल खुल गई है। कांट्रेक्ट पर रखे गए जिन अयोग्य कर्मचारियों को निकालने के लिए नगर निगम अधिकारियों ने ढोंग रचा था, वह भी आखिर कामयाब नहीं हो पाया। राजनीतिक दबाव में निगम ने फिर से उन सात लोगों को बैकडोर एंट्री दे दी है, जिन्होंने टेस्ट पास ही नहीं किया था। वैसे तो निगम में टेस्ट पास करने वाले काफी कम कर्मचारी हैं, जिन्हें टाइपिंग स्पीड में छूट दी गई थी। इसके बावजूद उन कर्मचारियों को भी रखा गया है, जो कंप्यूटर की सी तक नहीं जानते।
तीन बार हुए थे टेस्ट
नगर निगम ने जीजेयू में एक बार नहीं, बल्कि तीन बार कांट्रेक्टर पर कर्मचारी रखने के लिए टेस्ट लिया था। निगम को कुल 56 कर्मचारी रखने थे। नए कमिश्नर ने आते ही पारदर्शिता का खूब ढिंढोरा पीटा, लेकिन अंत में राजनीतिक दबाव में आकर उसे पुराने ढर्रे पर आ गए।
इन कर्मचारियों को बैक डोर से एंट्री
संजय, पूनम, नरेश, नीतू जांगड़ा, दिनेश शर्मा, हरीश, सुनील राजलीवाला को बैकडोर से एंट्री दी गई है।
पहले तो अधिकारी बड़े ढकोसले मार रहे। सरकार भी ढिंढोरे पीट रही है कि बीजेपी में पारदर्शिता से काम होते हैं अब कहां गई पारदर्शिता। इस मामले की जांच करवाई जाएगी।
- भीम महाजन, डिप्टी मेयर
- राजनीतिक दबाव में निगम अधिकारियों के धरे रह गए नियम