हिसार। जल जनित और मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य और जन स्वास्थ्य विभाग मिलकर अभियान चलाएंगे। यह निर्णय पिछले दिनों चलाए गए क्लोरीनेशन जांच अभियान में पानी के नमूने फेल पाए जाने के बाद लिया गया। इसको लेकर मंगलवार को दोनों विभागों की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया और संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को दिशानिर्देश जारी किए गए।
कार्यशाला का आयोजन कैमरी रोड पर जलघर स्थित प्रयोगशाला में किया गया। इसमें स्वास्थ्य विभाग के बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों, स्वास्थ्य निरीक्षक, जन स्वास्थ्य विभाग के पंप ऑपरेटर, कनिष्ठ अभियंता, उप मंडल अधिकारी, कार्यकारी अभियंता और केमिस्ट आदि ने भाग लिया। कार्यशाला की अध्यक्षता संयुक्त रूप से जन स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता संजय त्यागी व जसवंत सिंह और जिला मलेरिया नोडल अधिकारी डॉ. नवनीत अग्रवाल ने की। कार्यशाला में पहुंचे दोनों विभागों के कर्मचारियों को पानी की शुद्धता के लिए क्लोरीनेशन की उचित विधि, जांच के तरीके और पानी से होने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियों के बारे में जानकारी दी गई। विभाग के अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे के साथ मिलकर स्वच्छ जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर रणनीति बनाई, ताकि गर्मी के मौसम में जल जनित बीमारियों जैसे हैजा, पेचिश, उलटी-दस्त, पीलिया टाइफाइड आदि को फैलने से पूर्व अंकुश लगाया जा सके।
लीकेज को रोकने के प्रयास करें
बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता नूर मोह्मद ने बताया कि जहां कहीं पाइपलाइन में लीकेज हो रहा है, उसे रोकने की दिशा में कदम उठाए जाएं। लीकेज वाले स्थान पर मच्छर पनपते हैं, जिससे बीमारियों फैलती हैं। लीकेज की सूचना जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में लाई जाएगा, ताकि मच्छर जनित बीमारियों जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और जापानी बुखार की रोकथाम और बचाव किया जा सके।
दोनों विभागों का एक व्हाट्स एप ग्रुप बनाया
किसी भी तरह की समस्या के तुरंत समाधान के लिए दोनों विभागों के संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का एक व्हाट्स एप ग्रुप बनाया गया है। इसमें किसी भी तरह की समस्या को आपस में साझा कर तुरंत समाधान किया जाएगा।
साफ पानी हर नागरिक का मौलिक अधिकार
प्रयोगशाला के केमिस्ट राजीव सिहाग ने बताया कि स्वच्छ और साफ पानी की उपलब्धता संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। गांव और शहर के अंतिम छोर पर पानी में क्लोरीनेशन की मात्रा 0.2 पीपीएम और जलघर पर लगभग दो पीपीएम क्लोरीन की मात्रा रखनी जरूरी है। अधिक क्लोरीनेशन के कारण स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
ये रहे कार्यशाला में उपस्थित
कार्यशाला में जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ केएल पाहवा, एसके सरदाना, स्वास्थ्य निरीक्षक रमेश कुंडू, पवन आहुजा, सुखबीर सिंह, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता राजकुमार, बजरंग, सुनील शर्मा, अनूप, परमजीत, मनदीप राठी, सौरभ जन स्वास्थ्य विभाग के कनिष्ठ अभियंता सुनील कुमार, संजय दूहन, नरेश कुमार, अमरीक सिंह, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता अमित, नरेश, मंगल, राजशेखर, अनिल, रविंद्र, संदीप आदि उपस्थित रहे।